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भारत में कंडोम की समस्या पहुंच की नहीं है। यह चिंता मिथकों, चुप्पी और आनंद को लेकर है।

भारत में कंडोम की समस्या पहुंच की नहीं है। यह चिंता मिथकों, चुप्पी और आनंद को लेकर है।

वेंकटेश्वर याडलपल्ली, प्रमुख - आरएंडडी, गोदरेज कंज्यूमर प्रोडक्ट्स लिमिटेड (GCPL)

भारत दुनिया की सबसे युवा आबादी वाले देशों में से एक है-एक ऐसी पीढ़ी जो अपने जीवन के सबसे निजी और प्रजनन संबंधी वर्षों में प्रवेश कर रही है। फिर भी, कंडोम का उपयोग आश्चर्यजनक रूप से कम है, जबकि सही और नियमित उपयोग करने पर यह अनचाही गर्भावस्था और यौन संचारित संक्रमणों (STIs), जिनमें एचआईवी भी शामिल है, के खिलाफ अत्यधिक प्रभावी सुरक्षा प्रदान करता है। आज भी भारत में कंडोम को अपनाने में सांस्कृतिक मिथक और सामाजिक कलंक बाधा बने हुए हैं, जबकि यह सुरक्षित और संतोषजनक यौन संबंधों के लिए एक सुलभ, किफायती और सरल समाधान है। भारत में कंडोम उपयोग दर केवल 9.5% है और मात्र लगभग 13% पुरुष ही उनका नियमित उपयोग करते हैं। यही कारण है कि एचआईवी मामलों में भारत वैश्विक स्तर पर तीसरे नंबर पर है।

वर्ष 2021 की 'कंडोमोलॉजी रिपोर्ट' भारत में कंडोम के उपयोग से जुड़े मनोवैज्ञानिक पहलुओं पर प्रकाश डालने वाला अपनी तरह का पहला विस्तृत अध्ययन है। यह रिपोर्ट एक दिलचस्प विरोधाभास को रेखांकित करती है कि आज डेटिंग ऐप्स के बढ़ते चलन और यौन स्वास्थ्य पर अधिक खुली चर्चाओं के बावजूद, कंडोम से जुड़ी सामाजिक भ्रांतियां अब भी मजबूती से टिकी हुई हैं। शोध के अनुसार, आज भी 64% पुरुष यह मानते हैं कि कंडोम का उपयोग शारीरिक आनंद को कम कर देता है। इसके अलावा, एक बड़ी आबादी इसे दीर्घकालिक या गंभीर संबंधों का हिस्सा बनाने के बजाय केवल 'हुक-अप गियर' यानी अस्थायी संबंधों के साधन के रूप में देखती है। विडंबना यह भी है कि जहां पुरुष इसे आनंद में बाधक मानते हैं, वहीं अधिकांश महिलाओं को तो खुद की खुशी और संतुष्टि से जुड़े इन ऑप्शंस का पता तक नहीं है।

 

मिथक 1: “कंडोम से उत्तेजना कम हो जाती है।”

आज के भारतीय जोड़े केवल सुरक्षा ही नहीं, बल्कि आपसी संतुष्टि को भी प्राथमिकता दे रहे हैं। जहां 'अल्ट्रा-थिन' कंडोम 'स्किन-टू-स्किन' जैसा अहसास देकर प्राकृतिक उत्तेजना को जीवंत रखते हैं, वहीं 'डॉटेड' और 'रिब्ड' वेरिएंट्स विशेष रूप से महिलाओं के आनंद को बढ़ाने के लिए तैयार किए गए हैं। इसके अलावा, फ्लेवर्ड विकल्प न केवल मूड को बेहतर बनाते हैं, बल्कि आपकी अंतरंगता में एक नया उत्साह भर देते हैं। भारत में ये विकल्प तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं।

 

मिथक 2: “यह सिर्फ कैज़ुअल संबंधों के लिए हैं।”

कंडोम सिर्फ सुरक्षा का साधन नहीं, बल्कि एक-दूसरे के प्रति सम्मान और जिम्मेदारी का प्रतीक हैं। अनचाहे गर्भ और यौन संचारित संक्रमणों (STIs) से मिलने वाली दोहरी सुरक्षा इसे हर रिश्ते की बुनियाद बनाती है, फिर चाहे वह शादी हो या कोई दीर्घकालिक बंधन। अक्सर सामाजिक संकोच रिश्तों की सहजता में बाधा बनते हैं, लेकिन फ्लेवर्ड कंडोम उस झिझक को खत्म कर आपकी अंतरंगता में नया उत्साह और मिठास भर सकते हैं।

 

मिथक 3: “कंडोम फट जाते हैं या फिसल जाते हैं।”

आधुनिक कंडोम निर्माण के दौरान कई सख्त गुणवत्ता जांचों से गुजरते हैं। वास्तव में, अधिकांश प्रतिष्ठित निर्माताओं द्वारा ग्राहकों तक पहुंचने से पहले हर एक कंडोम का इलेक्ट्रॉनिक परीक्षण किया जाता है। इसलिए, यदि उन्हें सही ढंग से स्टोर किया जाए और निर्देशों के अनुसार उपयोग किया जाए, तो फटने या फिसलने की संभावना बहुत कम होती है। अधिकांश समस्याएं गलत स्टोरेज, गलत उपयोग या लुब्रिकेशन की कमी के कारण होती हैं।

अक्सर कंडोम के फटने का कारण असंगत लुब्रिकेंट का उपयोग होता है। उदाहरण के लिए, तेल-आधारित उत्पाद (जैसे नारियल तेल, पेट्रोलियम जेली या अन्य तेल) प्राकृतिक रबर लेटेक्स कंडोम के साथ कभी उपयोग नहीं करने चाहिए, क्योंकि वे कंडोम को कमजोर कर सकते हैं और उसकी मजबूती कम कर सकते हैं।

इसलिए, अच्छी तरह से लुब्रिकेटेड और 100% इलेक्ट्रॉनिक परीक्षण किए गए कंडोम का उपयोग करना चाहिए। यदि अतिरिक्त चिकनाई की आवश्यकता हो, तो घरेलू वस्तुओं (जैसे नारियल तेल) के बजाय पानी-आधारित, कंडोम-संगत पर्सनल लुब्रिकेंट का उपयोग करना चाहिए।

 

मिथक 5: “महिलाओं को कंडोम पसंद नहीं हैं।”

एक बेहतरीन रिश्ता आपसी खुशी और समझ पर टिका होता है। डॉटेड और रिब्ड डिज़ाइन के साथ स्टिम्युलेटिंग जेल्स का सही तालमेल न केवल संवेदनाओं (उत्तेजना) को बढ़ाता है, बल्कि सुरक्षा का ध्यान रखते हुए महिला साथी की संतुष्टि को प्राथमिकता देता है। यह अनुभव को और भी सुखद और यादगार बनाता है।

 मिथक 6: “सभी कंडोम एक जैसे महसूस होते हैं।”

यह धारणा बिल्कुल गलत है। सच तो यह है कि कंडोम का सही चुनाव आपके अंतरंग पलों को और भी यादगार बना सकता है। जहां पतले कंडोम रीयल-फील का एहसास देते हैं, वहीं डॉटेड और रिब्ड पैटर्न आनंद के नए स्तर छूने में मदद करते हैं। साथ ही, अलग-अलग फ्लेवर्स हर पल में एक नई ताजगी भर देते हैं। कामसूत्र जैसे भारतीय ब्रांड्स ने इन बारीकियों को समझकर ही अपनी पूरी रेंज विकसित की है, जिससे कपल्स को मिलता है सुरक्षा के साथ अपनी पसंद का बेहतरीन अनुभव।

ये मिथक सिर्फ पुरानी सोच नहीं, बल्कि हमारे स्वास्थ्य और खुशियों के लिए एक बड़ा जोखिम हैं। साल 1994 से अब तक पूरी दुनिया में कंडोम का इस्तेमाल तीन गुना बढ़ा है, जिसने लाखों जिंदगियों को संवारा है। भारत की असली चुनौती संसाधनों की कमी नहीं, बल्कि हमारी 'खामोशी' है। समाधान सीधा है: संकोच छोड़ें, सुरक्षा चुनें और जिम्मेदारी को आनंद का हिस्सा बनाएं। जब सुरक्षा और संतुष्टि साथ चलते हैं, तो जीत सबकी होती है- एक स्वस्थ जीवन और एक सुरक्षित भविष्य की।

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