मुंबई: वेदांता समूह ने भारतीय कॉर्पोरेट इतिहास
में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए अपनी चार नव-विभाजित (डीमर्ज्ड) कंपनियों को
बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) में सूचीबद्ध किया।
इस कदम के साथ समूह ने पाँच स्वतंत्र और केंद्रित व्यवसायों की स्थापना की है, जो भारत
के विकास के अगले चरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए तैयार हैं। इस ऐतिहासिक
अवसर का जश्न बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज में आयोजित एक विशेष समारोह में मनाया गया, जिसमें
उद्योग जगत के अग्रणी, निवेशक और अन्य हितधारक शामिल हुए।
इस अवसर पर बीएसई के प्रबंध निदेशक एवं
मुख्य कार्यकारी अधिकारी (एमडी एवं सीईओ) श्री सुंदररमन राममूर्ति ने कहा कि यह उपलब्धि
इसलिए भी विशेष है क्योंकि यह बीएसई के स्थापना दिवस के साथ संयोगवश आई है। उन्होंने
कहा कि यह केवल चार नई सूचीबद्ध कंपनियों का जन्म नहीं है, बल्कि भारत के पूंजी बाजार
के इतिहास में एक नए अध्याय की शुरुआत भी है।
वेदांता के चेयरमैन श्री अनिल अग्रवाल
की साधारण पृष्ठभूमि और वेदांता की विकास यात्रा की तुलना प्राचीन भारतीय कथा 'समुद्र
मंथन' से करते हुए श्री राममूर्ति ने कहा कि असाधारण उपलब्धियाँ अक्सर विनम्र शुरुआत
से ही जन्म लेती हैं। उन्होंने संस्कृत के प्रसिद्ध वाक्य "अल्पारम्भः क्षेमकरः"
का उल्लेख करते हुए कहा कि जो कार्य छोटे स्तर पर शुरू होते हैं, वे समय के साथ असाधारण
उपलब्धियों का रूप ले सकते हैं।
उन्होंने कहा, "जो यात्रा एक छोटे
से प्रयास के रूप में शुरू हुई थी, वह आज एक विराट स्वरूप ले चुकी है। वेदांता का कार्य
धरती माता की सतह के नीचे छिपे प्राकृतिक संसाधनों और समृद्धि को सामने लाना रहा है।
जिस प्रकार समुद्र मंथन से छिपे हुए रत्न और अमृत प्राप्त हुए, उसी प्रकार वेदांता
ने पिछले कई दशकों में जिंक, एल्युमीनियम, तांबा, लौह अयस्क, तेल, गैस और महत्वपूर्ण
खनिजों जैसे प्राकृतिक संसाधनों को खोजकर भारत की औद्योगिक प्रगति, ऊर्जा सुरक्षा और
आत्मनिर्भरता को सशक्त बनाया है।"
श्री राममूर्ति ने वेदांता के संस्थापक
एवं चेयरमैन श्री अनिल अग्रवाल की दृढ़ इच्छाशक्ति और संघर्षशील नेतृत्व की भी सराहना
की। उन्होंने संस्कृत के श्लोक "सुधां विना न प्रययुः विरामं, न निश्चितार्थाद्
विरमन्ति धीराः" का उल्लेख करते हुए कहा कि साहसी व्यक्ति अपने लक्ष्य की
प्राप्ति से पहले कभी रुकते नहीं हैं। उन्होंने कहा कि समुद्र मंथन के दौरान जब विष
निकला, तब भी देवताओं ने हार नहीं मानी और अंततः अमृत प्राप्त किया। उसी प्रकार श्री
अग्रवाल ने भी चुनौतियों और अवसरों के बीच अपने लक्ष्य से कभी समझौता नहीं किया तथा
भारत के भविष्य पर विश्वास रखते हुए निरंतर निवेश, विस्तार और मूल्य सृजन का कार्य
जारी रखा।
श्री राममूर्ति ने श्री अनिल अग्रवाल
के नेतृत्व की प्रशंसा करते हुए कहा कि असली महानता हमेशा विनम्रता के साथ आती है।
उन्होंने कहा कि अपनी असाधारण उपलब्धियों के बावजूद श्री अग्रवाल आज भी सादगी, सहजता
और समाज के प्रति गहरी प्रतिबद्धता का परिचय देते हैं। उन्होंने अनिल अग्रवाल फाउंडेशन
के सामाजिक योगदान का भी उल्लेख किया और कहा कि नंद घर जैसी पहल के माध्यम से
देशभर में 10,000 से अधिक आंगनवाड़ी केंद्रों का आधुनिकीकरण किया गया है, जिससे महिलाओं
और बच्चों के जीवन में व्यापक सकारात्मक परिवर्तन आया है।
अपने संबोधन के समापन में श्री राममूर्ति
ने कहा कि यह ऐतिहासिक लिस्टिंग दूरदृष्टि, साहस और दशकों की निरंतर मेहनत की विजय
का प्रतीक है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि वेदांता के ये पाँच स्वतंत्र व्यवसाय
आने वाले वर्षों में हजारों नए उद्यमों को जन्म देंगे, उद्यमिता और रोजगार के नए अवसर
पैदा करेंगे तथा भविष्य में अनेक नई कंपनियों के शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने का मार्ग
प्रशस्त करेंगे।