चीन की एक स्टार्टअप कंपनी Gestala इंसानों और मशीनों के बीच कनेक्शन को बदलने की कोशिश कर रही है। ब्रेन इम्प्लांट या सर्जरी की जगह, यह कंपनी ऐसा ब्रेन कंप्यूटर इंटरफेस बनाना चाहती है जो सिर के बाहर से ही काम करे।
अगर यह तकनीक सफल होती है, तो डॉक्टर और मशीनें बिना खोपड़ी काटे या दिमाग में चिप लगाए सीधे दिमाग से जुड़ सकेंगी। यही वजह है कि Gestala का आइडिया आज की ब्रेन टेक्नोलॉजी की दुनिया के सबसे साहसी प्रयोगों में से एक माना जा रहा है।
Gestala दूसरी ब्रेन टेक कंपनियों से कैसे अलग है
ज्यादातर ब्रेन कंप्यूटर इंटरफेस प्रोजेक्ट इम्प्लांट पर आधारित होते हैं। Neuralink जैसी कंपनियां दिमाग में छोटे इलेक्ट्रोड लगाकर सिग्नल पढ़ती हैं। यह तरीका असरदार हो सकता है, लेकिन इसमें सर्जरी की जरूरत होती है और इसके साथ कई जोखिम भी जुड़े होते हैं।
Gestala इस रास्ते से पूरी तरह बचना चाहता है। इम्प्लांट की जगह कंपनी फोकस्ड अल्ट्रासाउंड पर काम कर रही है, जो पहले से मेडिकल स्कैन और इलाज में इस्तेमाल हो रही तकनीक है। इसका उद्देश्य साउंड वेव्स के जरिए दिमाग की गतिविधि से सुरक्षित और बिना चीरे के जुड़ना है।
यह तरीका ब्रेन टेक्नोलॉजी को ज्यादा सुरक्षित बना सकता है और ज्यादा लोगों तक पहुंचा सकता है।
अल्ट्रासाउंड दिमाग से कैसे जुड़ सकता है
अल्ट्रासाउंड शरीर के अंदर साउंड वेव्स भेजकर काम करता है। डॉक्टर पहले से ही इसका इस्तेमाल अंगों को देखने और कुछ बीमारियों के इलाज में करते हैं।
Gestala का मानना है कि अल्ट्रासाउंड दिमाग के गहरे हिस्सों तक पहुंच सकता है और न्यूरॉन्स के व्यवहार को प्रभावित कर सकता है। समय के साथ कंपनी उम्मीद कर रही है कि वह दिमाग की गतिविधि के पैटर्न पहचान सके और उनके अनुसार प्रतिक्रिया दे सके।
इम्प्लांट की तरह इलेक्ट्रिकल सिग्नल पढ़ने की बजाय, अल्ट्रासाउंड ब्लड फ्लो और दिमागी प्रतिक्रियाओं में होने वाले बदलावों को देखेगा। यह प्रक्रिया थोड़ी धीमी है, लेकिन इससे दिमाग के ज्यादा हिस्सों को एक साथ कवर किया जा सकता है।
पहला लक्ष्य दर्द से राहत क्यों है
Gestala फिलहाल विचार पढ़ने जैसी बातों पर काम नहीं कर रहा है। उसका पहला लक्ष्य कहीं ज्यादा प्रैक्टिकल है।
कंपनी एक ऐसा मेडिकल डिवाइस बनाना चाहती है जो अल्ट्रासाउंड की मदद से क्रॉनिक दर्द से जूझ रहे लोगों को राहत दे सके। रिसर्च बताती है कि दर्द से जुड़े दिमागी हिस्सों को टारगेट करने से कई दिनों तक आराम मिल सकता है।
इस डिवाइस का पहला वर्जन संभवतः बड़ा होगा और अस्पताल या क्लिनिक में इस्तेमाल किया जाएगा। मरीज इसे पूरे दिन पहनने के बजाय डॉक्टर की निगरानी में इलाज के लिए इस्तेमाल करेंगे।
यह दिखाता है कि Gestala भविष्य की बड़ी सोच से पहले असली मेडिकल जरूरतों पर ध्यान दे रहा है।
तो क्या यही सही रास्ता है
Gestala का आइडिया कुछ लोगों को असहज लग सकता है, और यही वजह है कि यह इतना अहम है।
ब्रेन टेक्नोलॉजी की शुरुआत सर्जरी से नहीं होनी चाहिए। इसकी शुरुआत सुरक्षा, सावधानी और साफ मेडिकल मकसद से होनी चाहिए। स्वस्थ दिमाग में चिप लगाना भले ही भविष्य जैसा लगे, लेकिन इसके साथ डर, जोखिम और नैतिक सवाल भी जुड़े होते हैं।
नॉन-इनवेसिव तरीका भले ही थोड़ा धीमा और कम दिखावटी हो, लेकिन यह इंसानी शरीर का सम्मान करता है। अगर ब्रेन कंप्यूटर इंटरफेस को कभी रोजमर्रा की हेल्थकेयर का हिस्सा बनना है, तो पहले भरोसा जीतना होगा, उत्साह नहीं।
Gestala सुपरह्यूमन ताकतों या माइंड रीडिंग का दावा नहीं कर रहा है। वह एक ज्यादा जरूरी सवाल पूछ रहा है। क्या हम बिना दिमाग खोले उसे ठीक करने में मदद कर सकते हैं।
अगर ब्रेन टेक्नोलॉजी का भविष्य सफल होना है, तो वह शायद उन्हीं कंपनियों के पास जाएगा जो दिखावे की बजाय धैर्य चुनेंगी। Gestala आज भले ही बड़ी सुर्खियां न बनाए, लेकिन लंबे समय में यह रास्ता ज्यादा समझदारी और जिम्मेदारी वाला साबित हो सकता है।