Aravind Srinivas, जो Perplexity AI के CEO हैं, हाल ही में तकनीक और कंप्यूटर साइंस के भविष्य को लेकर चर्चा में आए हैं। उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते उपयोग के कारण कंप्यूटर साइंस धीरे-धीरे फिर से मैथ्स और फिजिक्स जैसे विषयों की ओर लौट रहा है।
उनकी यह टिप्पणी टेक दुनिया में काफी चर्चा का विषय बन गई है।
AI बदल रहा है प्रोग्रामिंग का तरीका
आजकल कई प्रोग्रामर कोड लिखने के लिए AI टूल्स का इस्तेमाल कर रहे हैं। ये टूल्स जल्दी कोड लिख सकते हैं, गलतियां ठीक कर सकते हैं और काम को तेज बना सकते हैं।
इसी कारण कई आसान कोडिंग काम अब AI से हो जाते हैं। पहले जिन कामों में कई घंटे लगते थे, अब वे कुछ ही मिनटों में पूरे हो सकते हैं।
फिर भी जरूरी हैं अच्छे इंजीनियर
हालांकि Aravind Srinivas का मानना है कि AI पूरी तरह से प्रोग्रामरों की जगह नहीं ले सकता।
कठिन काम जैसे सिस्टम डिजाइन, जटिल एल्गोरिदम और बड़ी तकनीकी समस्याओं को हल करना अभी भी इंसानों के ज्ञान और अनुभव पर ही निर्भर करता है।
इसी वजह से भविष्य में कंप्यूटर साइंस पढ़ने वाले छात्रों को गहरी समझ और मजबूत बेसिक्स की जरूरत होगी।
क्यों बढ़ रही है मैथ्स और फिजिक्स की अहमियत
कंप्यूटर साइंस के शुरुआती समय में इसका गहरा संबंध मैथ्स और फिजिक्स से था। इन विषयों की मदद से ही कई नई तकनीकों का विकास हुआ।
अब जब AI आसान कोडिंग कर सकता है, तो प्रोग्रामर का ध्यान फिर से लॉजिक, थ्योरी और समस्या समाधान पर ज्यादा होगा।
डेवलपर्स के लिए AI बन रहा है मददगार
AI टूल्स डेवलपर्स के काम को तेज बना रहे हैं। कई रिपोर्ट्स के अनुसार, AI कोडिंग टूल्स से प्रोग्रामर की प्रोडक्टिविटी काफी बढ़ सकती है।
इससे डेवलपर्स को ज्यादा समय मिलता है ताकि वे बड़े और रचनात्मक प्रोजेक्ट्स पर काम कर सकें।
Perplexity AI के बारे में
Perplexity AI एक तेजी से बढ़ती AI कंपनी है। यह एक AI-पावर्ड सर्च इंजन बनाती है।
यह सर्च इंजन सिर्फ लिंक नहीं दिखाता बल्कि सवालों के सीधे जवाब और उनके स्रोत भी देता है।
निष्कर्ष
Aravind Srinivas का कहना है कि AI आने वाले समय में प्रोग्रामिंग के तरीके को बदल देगा। लेकिन इससे इंजीनियरों की जरूरत खत्म नहीं होगी।
इसके बजाय भविष्य में डेवलपर्स को मैथ्स, लॉजिक और गहरी तकनीकी समझ पर ज्यादा ध्यान देना होगा। AI और कंप्यूटर साइंस मिलकर टेक्नोलॉजी की दुनिया को तेजी से बदल रहे हैं।