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बेंगलुरु का स्टार्टअप अंतरिक्ष में खराब होते सैटेलाइट्स को बचाना चाहता है

बेंगलुरु का स्टार्टअप अंतरिक्ष में खराब होते सैटेलाइट्स को बचाना चाहता है

बेंगलुरु का एक स्टार्टअप अंतरिक्ष की दुनिया में बड़ा बदलाव लाने की तैयारी कर रहा है। कंपनी का नाम Aule Space है और इसका लक्ष्य ऐसे सैटेलाइट्स तक पहुंचना है जो ईंधन खत्म होने या तकनीकी दिक्कतों के कारण काम करना बंद करने वाले होते हैं। उन्हें बेकार होने देने की बजाय, यह स्टार्टअप उनकी उम्र बढ़ाना चाहता है।

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आज पृथ्वी के चारों ओर हजारों सैटेलाइट घूम रहे हैं। ये संचार, इंटरनेट, मौसम की जानकारी, नेविगेशन और कई जरूरी सेवाओं में मदद करते हैं। लेकिन अक्सर सैटेलाइट पूरी तरह खराब नहीं होते, बस उनका ईंधन खत्म हो जाता है या वे अपनी सही कक्षा से हट जाते हैं। इसके बाद वे अंतरिक्ष में कचरे की तरह तैरते रहते हैं।

Aule Space का आइडिया है कि छोटे-छोटे विशेष यान भेजे जाएं जो इन सैटेलाइट्स तक पहुंचें और उनसे जुड़ जाएं। इन्हें आप एक तरह का स्पेस जेटपैक भी कह सकते हैं। ये सैटेलाइट को सही दिशा और कक्षा में बनाए रखने में मदद करेंगे, ताकि वह कई साल और काम कर सके।

इससे बड़ा फायदा हो सकता है। सैटेलाइट बनाना और लॉन्च करना बहुत महंगा होता है। अगर किसी सैटेलाइट की उम्र बढ़ जाती है, तो कंपनियों का काफी पैसा बच सकता है। साथ ही, अंतरिक्ष में बढ़ते मलबे की समस्या भी कम हो सकती है।

हालांकि यह काम आसान नहीं है। अंतरिक्ष में चीजें बहुत तेज गति से चलती हैं और वहां पहुंचकर किसी सैटेलाइट के पास जाना और सुरक्षित तरीके से जुड़ना बेहद जटिल प्रक्रिया है। इसके लिए बहुत उन्नत तकनीक और ऑटोमेटेड सिस्टम की जरूरत होती है। Aule Space ऐसी तकनीक विकसित कर रहा है जिसमें कंप्यूटर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से यह काम किया जाएगा।

फिलहाल कंपनी जमीन पर टेस्ट और सिमुलेशन कर रही है। इन परीक्षणों से इंजीनियर यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि असली अंतरिक्ष मिशन से पहले किन चीजों को बेहतर बनाना जरूरी है।

स्टार्टअप को शुरुआती निवेश भी मिला है, जिससे वह अपनी रिसर्च और विकास को आगे बढ़ा रहा है। आने वाले समय में कंपनी एक डेमो मिशन भेजने की तैयारी कर रही है, जिससे यह दिखाया जा सके कि सैटेलाइट से जुड़ने की तकनीक वास्तव में काम करती है।

अगर यह योजना सफल होती है, तो भविष्य में सैटेलाइट्स को जल्दी रिटायर नहीं करना पड़ेगा। वे ज्यादा समय तक सेवाएं दे पाएंगे। इससे अंतरिक्ष उद्योग में एक नया मॉडल बन सकता है और कचरा भी कम होगा।

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