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हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड ने संसाधन सुरक्षा पर फोकस तेज किया, डाउनस्ट्रीम इकोसिस्टम को आगे बढ़ाया

हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड ने संसाधन सुरक्षा पर फोकस तेज किया, डाउनस्ट्रीम इकोसिस्टम को आगे बढ़ाया

हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड अपने आप को एक भविष्य-तैयार, विविधीकृत धातु और महत्वपूर्ण खनिज (क्रिटिकल मिनरल्स) कंपनी में बदलने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। कंपनी का स्पष्ट लक्ष्य भारत की संसाधन सुरक्षा को मजबूत करना और घरेलू वैल्यू चेन का निर्माण करना है।

शेयरधारकों के लिए अपने संदेश में चेयरपर्सन प्रिया अग्रवाल हेब्बर ने कहा कि संसाधन सुरक्षा आने वाले समय में औद्योगिक और आर्थिक विकास का प्रमुख आधार बनेगी, क्योंकि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाएं अब केवल दक्षता से हटकर मजबूती की ओर बढ़ रही हैं। उन्होंने कहा, “भारत के सामने एक महत्वपूर्ण चुनौती है—सभी क्रिटिकल मिनरल्स के लिए आयात पर अपनी भारी निर्भरता को कम करना। आपकी कंपनी इस प्रयास का नेतृत्व करने की उत्कृष्ट स्थिति में है।”

कंपनी की रणनीतिक HZL 2.0 यात्रा पारंपरिक जिंक और सिल्वर उत्पादक से एक भविष्य-तैयार मल्टी-मेटल प्लेटफॉर्म में बदलाव को दर्शाती है। इस परिवर्तन का उद्देश्य क्रिटिकल मिनरल्स के लिए एक एकीकृत इकोसिस्टम बनाना है, जो भारत की संसाधन सुरक्षा और वैश्विक मांग—दोनों को समर्थन दे सके।

उन्होंने आगे कहा कि आने वाले दशकों में भारत की प्रगति इस बात पर निर्भर करेगी कि वह क्रिटिकल मिनरल्स को सुरक्षित करने और वैल्यू चेन में घरेलू क्षमताओं का निर्माण करने में कितना सक्षम है। हिंदुस्तान जिंक इस दिशा में देश के संसाधन आधार को मजबूत करने, डाउनस्ट्रीम उद्योगों को सक्षम बनाने और आत्मनिर्भरता के व्यापक लक्ष्य को समर्थन देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की स्थिति में है।

कंपनी जिंक और सिल्वर से आगे बढ़ते हुए क्रिटिकल मिनरल्स की नीलामी में भाग ले रही है और टंगस्टन, पोटाश, रेयर अर्थ एलिमेंट्स और हैलाइट जैसे खनिजों के ब्लॉक्स हासिल कर रही है। यह भारत की राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप दीर्घकालिक संसाधन क्षमता विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

इस रणनीति का एक प्रमुख स्तंभ राजस्थान में जिंक पार्क्स का विकास है। त्रिपुरा ग्रुप और सीएमआर ग्रीन टेक्नोलॉजीज के साथ साझेदारी में, कंपनी जिंक-आधारित मैन्युफैक्चरिंग के लिए एक एकीकृत इकोसिस्टम तैयार कर रही है। इससे भारत में वैल्यू एडिशन बढ़ेगा, एमएसएमई को समर्थन मिलेगा और यह एक स्केलेबल औद्योगिक क्लस्टर के रूप में विकसित होगा।

कंपनी ने मजबूत परिचालन प्रदर्शन जारी रखते हुए वित्त वर्ष 25–26 में 1,114 किलो टन (kt) का अब तक का सबसे अधिक माइनड मेटल उत्पादन और 1,048 kt का रिफाइंड मेटल उत्पादन हासिल किया। सिल्वर उत्पादन 627 टन रहा, जो क्लीन एनर्जी और एडवांस टेक्नोलॉजी में इसकी बढ़ती भूमिका को दर्शाता है। वैश्विक स्तर पर कम लागत वाले उत्पादकों में शामिल होकर कंपनी ने अपनी प्रतिस्पर्धात्मक और मजबूत स्थिति बनाए रखी है।

वित्तीय रूप से, कंपनी ने ₹40,844 करोड़ का राजस्व और ₹22,162 करोड़ का एबिटडा दर्ज किया, जिसमें मजबूत मार्जिन और लगातार कैश जनरेशन शामिल है। वर्ष के दौरान सरकार को कंपनी का योगदान लगभग ₹19,000 करोड़ रहा, जिससे विनिवेश के बाद कुल योगदान ₹2,05,500 करोड़ से अधिक हो गया है।

सस्टेनेबिलिटी और टेक्नोलॉजी कंपनी के संचालन का प्रमुख हिस्सा बने हुए हैं। कुल ऊर्जा उपयोग में लगभग 18% हिस्सा अब नवीकरणीय ऊर्जा का है, जिसे सेरेंटिका जैसी साझेदारियों से समर्थन मिला है। कंपनी ऑटोमेशन, डेटा एनालिटिक्स और एआई आधारित सिस्टम के जरिए डिजिटल माइनिंग को भी आगे बढ़ा रही है, साथ ही जिंक टेलिंग्स रीप्रोसेसिंग और लो-कार्बन उत्पादों पर भी काम कर रही है।

हिंदुस्तान जिंक समावेशन में भी अग्रणी है, जहां महिलाओं की हिस्सेदारी कार्यबल में 26% से अधिक है, जो इस क्षेत्र में सबसे अधिक में से एक है। ‘नंद घर’ जैसी सामुदायिक पहलें अब 4,000 से अधिक गांवों तक पहुंच रही हैं और 26 लाख लोगों को प्रभावित कर रही हैं।

भविष्य को देखते हुए, कंपनी का फोकस क्रिटिकल मिनरल्स के लिए एक एकीकृत प्लेटफॉर्म बनाने, साझेदारियों के माध्यम से एक्सप्लोरेशन और वैल्यू चेन में विस्तार करने और साथ ही लागत नियंत्रण तथा परिचालन अनुशासन बनाए रखने पर रहेगा।

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