कई फंड हाउस वेदांता एल्युमीनियम में दिलचस्पी दिखा रहे हैं, और भारत में पावर-ट्रांसमिशन के विस्तार से कंपनी के लिए एल्युमीनियम की लॉन्ग टर्म मांग बढ़ने के मौके भी बन रहे हैं।
म्यूचुअल फंड्स ने इक्विटी निवेश में चुनिंदा तरीका अपनाया है। वे बढ़ती ब्याज दरों और कई आईपीओ (इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग) की कतार को देखते हुए अपने पोर्टफोलियो का दोबारा आकलन कर रहे हैं। फंड मैनेजर अलग-अलग सेक्टर में बड़े पैमाने पर निवेश करने के बजाय खास स्टॉक्स के बीच अंतर कर रहे हैं। वे उन कंपनियों में निवेश बढ़ा रहे हैं जिनकी कमाई और ग्रोथ की संभावनाएं बेहतर दिख रही हैं, जबकि दूसरी कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी कम कर रहे हैं या उससे बाहर निकल रहे हैं।
संस्थागत निवेशकों के पसंदीदा स्टॉक्स में वेदांता एल्युमीनियम मेटल लिमिटेड (बीएसई- 544780, एनएसई-वीएएमएल) भी शामिल रही। एमएफ स्कैनर के म्यूचुअल-फंड पोर्टफोलियो डेटा के अनुसार, अगस्त 2026 में 54 म्यूचुअल फंड्स ने वेदांता एल्युमीनियम में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई या नई हिस्सेदारी खरीदी। इस महीने के दौरान कुल मिलाकर 17.51 मिलियन अतिरिक्त शेयर खरीदे गए।
इसमें कई फंड्स की भागीदारी उल्लेखनीय है। एसबीआई फ्लेक्सीकैप फंड ने वेदांता एल्युमीनियम के सबसे ज़्यादा शेयर खरीदे (4.27 मिलियन शेयर), जबकि आदित्य बिड़ला सन लाइफ लार्ज कैप फंड ने 4 मिलियन अतिरिक्त शेयर खरीदे। एसबीआई मल्टी एसेट एलोकेशन फंड ने 2 मिलियन शेयरों के साथ नई हिस्सेदारी शुरू की, जबकि बंधन लार्ज एंड मिड कैप फंड ने कंपनी के 1.77 मिलियन शेयर खरीदे। यूटीआई लार्ज कैप फंड ने वेदांता एल्युमीनियम में अपनी हिस्सेदारी 1.17 मिलियन शेयर बढ़ाई और निप्पॉन इंडिया मल्टी कैप फंड ने 1 मिलियन शेयर जोड़े हैं। हिस्सेदारी बढ़ाने वाले अन्य फंड्स में आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल मल्टी-एसेट फंड, यूटीआई एमएनसी फंड, अबाकस फ्लेक्सी कैप फंड, निप्पॉन इंडिया विजन लार्ज एंड मिड कैप फंड, मिरे एसेट मिडकैप फंड, टाटा रिसोर्सेज एंड एनर्जी फंड और कई अन्य शामिल हैं।
नुवामा, एमके ग्लोबल, मोतीलाल ओसवाल, सिटी और इन्वेस्टेक जैसी ब्रोकरेज फर्मों ने भी वीएएमएल को बाय रेटिंग दी है।
संस्थागत निवेशकों की यह दिलचस्पी वेदांता एल्युमीनियम के शानदार ऑपरेटिंग परफॉर्मेंस के कारण है। वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में, कंपनी ने रु21,105 करोड़ का रिकॉर्ड तिमाही रेवेन्यू, रु10,499 करोड़ का म्ठप्ज्क्। और रु6,597 करोड़ का मुनाफा दर्ज किया। साथ ही, कंपनी ने 632 किलोटन का अब तक का सबसे ज़्यादा तिमाही एल्युमीनियम उत्पादन भी किया। वैल्यू-एडेड एल्युमीनियम का प्रोडक्शन रिकॉर्ड 389 किलोटन तक पहुँच गया, जबकि एल्युमिना का प्रोडक्शन साल-दर-साल 41 फीसदी बढ़कर 826 किलोटन हो गया, जो इसकी बढ़ी हुई क्षमता के सदुपयोग को दर्शाता है।
अर्निंग के नियर-टर्म परफोर्मेन्स के अलावा, वेदांता एल्युमीनियम के विकास को भारत के बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर और इलेक्ट्रिफिकेशन साइकल से भी सपोर्ट मिल रहा है। उदाहरण के लिए, भारत में ट्रांसमिशन के विस्तार से एल्युमीनियम की बड़ी मांग पैदा हो सकती है; नेशनल इलेक्ट्रिसिटी प्लान के तहत 2032 तक ट्रांसमिशन इंफ्रास्ट्रक्चर में रु9.15 लाख करोड़ से ज़्यादा के निवेश का अनुमान है। इलेक्ट्रिकल कामों में एल्युमीनियम की खपत वित्तीय वर्ष 24 में लगभग 2.4 मिलियन टन थी जो वित्तीय वर्ष 30 तक बढ़कर 4 मिलियन टन होने का अनुमान है, जिसमें एल्युमीनियम की घरेलू खपत में ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन का बड़ा हिस्सा होगा। इसके परिणामस्वरूप इलेक्ट्रिकल-ग्रेड एल्युमीनियम प्रोडक्ट्स (जैसे वायर रॉड्स, जिनका कंपनी दुनिया में सबसे बड़ी प्रोड्यूसर है और जो केबल और कंडक्टर में इस्तेमाल होते हैं) की मांग से उन उत्पादाकों को लॉन्ग-टर्म फायदा मिल सकता है जिनके पास इंटीग्रेटेड एल्युमीनियम ऑपरेशन्स और डाउनस्ट्रीम क्षमताएं हैं। वेदांता एल्युमीनियम, इंटीग्रेटेड ऑपरेशन्स और एल्युमीनियम वैल्यू चेन में अपनी स्थिति के कारण, बिजली-इंफ्रास्ट्रक्चर के इस बढ़ते मौके का फायदा उठाने के लिए अच्छी स्थिति में है।
वैल्यू-एडेड प्रोडक्ट्स में कंपनी की मौजूदगी एल्युमीनियम की बदलती मांग के बीच इसकी स्थिति को और मजबूत बनाती है। इसके डाउनस्ट्रीम पोर्टफोलियो में वायर रॉड्स, बिलेट्स, रोल्ड प्रोडक्ट्स और अन्य वैल्यू-एडेड एल्युमीनियम प्रोडक्ट्स शामिल हैं, जिससे कंपनी प्राइमरी मेटल की मांग से आगे बढ़कर भी काम कर सकती है।
इसलिए, म्यूचुअल फंड की एक्टिविटी इंस्टीट्यूशनल भागीदारी, मजबूत ऑपरेटिंग परफॉर्मेंस और कई सालों तक चलने वाले संरचनात्मक मांग चक्र के एक दिलचस्प मोड़ पर है। यह किसी एक फंड के पोर्टफोलियो का फैसला नहीं है, बल्कि कई फंड्स का निवेश बढ़ाना यह बताता है कि निवेश की संभावनाएं वेदांता एलुमिनियम की -कमाई की रफ्तार और पैमाने से लेकर इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी एल्युमीनियम की मांग और वैल्यू-एडेड प्रोडक्ट्स तक- इसके सभी पहलुओं को पहचान रहीं हैं।