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'चॉक और पनीर' के संशय में फंसी मौद्रिक नीति; अनिश्चित मानसून और वैश्विक दबाव के बीच समन्वित नीतिगत उपायों की दरकार: एसबीआई इकोरैप

'चॉक और पनीर' के संशय में फंसी मौद्रिक नीति; अनिश्चित मानसून और वैश्विक दबाव के बीच समन्वित नीतिगत उपायों की दरकार: एसबीआई इकोरैप

मुंबई : भारतीय स्टेट बैंक (SBI) रिसर्च ने अपनी नवीनतम इकोरैप रिपोर्ट (अंक 20, वित्त वर्ष 27) में मौद्रिक नीति में पैदा हुए 'चॉक और पनीर' (अंतर न समझ पाने की स्थिति) के विरोधाभास को रेखांकित किया है। रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के विभिन्न बयानों में अलग-अलग संकेत मिल रहे हैं। जहां एक ओर मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक के मिनट्स मुद्रास्फीति (महंगाई) के जोखिमों और नीतिगत दरों में सख्ती की संभावना पर ध्यान केंद्रित करते हुए कड़ा (Hawkish) रुख दिखाते हैं, वहीं आरबीआई गवर्नर का वक्तव्य अधिक धैर्यवान, आंकड़ों पर आधारित और आर्थिक विकास को प्राथमिकता देने वाला नजर आता है

एसबीआई रिसर्च द्वारा किए गए 'नेचुरल लैंग्वेज प्रोसेसिंग' (NLP) टोन विश्लेषण के अनुसार, गवर्नर के बयान के मुकाबले एमपीसी मिनट्स का रुख अधिक सख्त दर्ज किया गया है। इस नीतिगत विरोधाभास के कारण बाजार इस उलझन में है कि क्या अक्टूबर में ब्याज दरों में बढ़ोतरी होगी या केंद्रीय बैंक 'इंतजार करो और देखो' की नीति पर कायम रहेगा। रिपोर्ट में कहा गया है कि वैश्विक और घरेलू परिस्थितियों को देखते हुए दरें बढ़ाने का फैसला बेहद संवेदनशील स्थिति में है। वैश्विक स्तर पर, अमेरिका में बढ़ता राष्ट्रीय कर्ज ($40 ट्रिलियन से अधिक) और ट्रेजरी द्वारा बॉन्ड बायबैक जैसे कदम फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीतियों को जटिल बना रहे हैं

घरेलू मोर्चे पर, मानसून की असमान और अनिश्चित प्रगति ने कृषि अर्थव्यवस्था की चिंता बढ़ा दी है। स्काईमेट (Skymet) ने 2026 के मानसून पूर्वानुमान को घटाकर एलपीए (LPA) का 85% कर दिया है और अल नीनो (El Niño) के प्रभाव के कारण सूखे की 70% संभावना जताई है। हालांकि राष्ट्रीय स्तर पर बारिश की कमी केवल 13% है, लेकिन बिहार (-41%), आंध्र प्रदेश (-39%), पंजाब (-32%) और कर्नाटक (-22%) जैसे प्रमुख खाद्यान्न उत्पादक राज्य भारी घाटे का सामना कर रहे हैं। जुलाई में सीपीआई मुद्रास्फीति 4.45% दर्ज की गई थी, जिसके अक्टूबर-नवंबर में 6% के स्तर को पार करने और फिर वित्त वर्ष 27 की चौथी तिमाही में ~5% तक आने का अनुमान है।

एसबीआई रिसर्च का सुझाव है कि इस समय ब्याज दरों में बढ़ोतरी जैसे मौद्रिक कठोर कदमों के बजाय ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सहारा देने के लिए लक्षित राजकोषीय उपायों (Fiscal Measures) पर ध्यान देना आवश्यक है। हाल ही में शुरू की गई 'वीबी-जी राम जी' (VB-G RAM G) ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के दायरे को आने वाले महीनों में और बढ़ाने की जरूरत है। रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि एक तरफ ग्रामीण रोजगार बढ़ाने के लिए विस्तारवादी राजकोषीय नीति और दूसरी तरफ दरों में बढ़ोतरी के जरिए सख्त मौद्रिक नीति को एक साथ चलाना कठिन होगा, इसलिए वर्तमान स्थिति में समन्वित मौद्रिक एवं राजकोषीय प्रतिक्रिया (Coordinated Monetary & Fiscal Response) समय की मांग है

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