देहरादून: विद्यार्थियों
में पठन-संस्कृति को प्रोत्साहित करने तथा उन्हें साहित्य की विविध विधाओं और
समकालीन विषयों से परिचित कराने के उद्देश्य से वैली ऑफ वर्ड्स,
साहित्य अकादमी एवं यूनियन बैंक के संयुक्त सहयोग से वैल्हम गर्ल्स स्कूल, देहरादून
में आयोजित दो दिवसीय साहित्यिक समारोह ‘वैल्हम साहित्य स्पृहा’ संपन्न हुआ।
समारोह के प्रथम दिवस का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन एवं
भरतनाट्यम की मनोहारी प्रस्तुति से हुआ। उद्घाटन सत्र में वैल्हम गर्ल्स स्कूल के
बोर्ड ऑफ गवर्नर्स की सदस्य एवं वैली ऑफ वर्ड्स की फेस्टिवल डायरेक्टर डॉ. संजीव चोपड़ा ने साहित्य और
पठन-संस्कृति के महत्व पर अपने विचार व्यक्त किए। प्रथम दिवस में ‘त्रिमाया’,
‘चोर गली में तितलियाँ’, ‘कबिरा सोई पीर
है’,
‘स्त्री अस्मिता का इतिहास’, ‘श्रेयसी’,
‘मेघ मल्हार’ और ‘मतलब हिन्दू’
जैसी कृतियों पर केंद्रित विभिन्न सत्र आयोजित किए गए, जिनमें साहित्यकारों एवं वार्ताकारों ने विविध साहित्यिक, सामाजिक और समकालीन विषयों पर सार्थक संवाद किया।
द्वितीय दिवस का शुभारंभ वरिष्ठ लेखक देवेंद्र मेवाड़ी के संस्मरण ‘यायावर की यादें’ पर आयोजित परिचर्चा से
हुआ। इसके पश्चात
‘नाच’, ‘ऑर्बिटल’, ‘पानदान’
और
‘डाकिनी’ जैसी कृतियों
पर साहित्यकारों,
अनुवादकों और वार्ताकारों के साथ संवादपरक सत्र आयोजित किए
गए। इन सत्रों में कला,
पहचान, अनुवाद, मानवीय संबंधों,
लोकविश्वास और सामाजिक धारणाओं जैसे विविध विषयों पर
विचार-विमर्श हुआ।
समारोह की विशेषता रही विद्यार्थियों की सक्रिय सहभागिता। वैल्हम गर्ल्स स्कूल की छात्राओं तथा
आमंत्रित अन्य विद्यालयों के छात्र-छात्राओं ने विभिन्न सत्रों में साहित्यकारों
के साथ संवाद किया,
उत्सुकतापूर्वक प्रश्न पूछे और चर्चाओं को आगे बढ़ाने में
सक्रिय भूमिका निभाई। इन संवादपरक सत्रों के माध्यम से विद्यार्थियों को लेखकों की
सृजनात्मक सोच,
अनुभवों और साहित्यिक दृष्टिकोण को समझने का अवसर मिला।
समारोह के समापन में
उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय, हरिद्वार की पूर्व कुलपति डॉ. सुधा रानी पांडे की गरिमामयी उपस्थिति रही। उन्होंने समारोह की साहित्यिक एवं शैक्षिक
प्रासंगिकता को रेखांकित करते हुए विद्यार्थियों के बीच साहित्य के प्रति रुचि और
संवाद की संस्कृति को बढ़ावा देने के प्रयासों की सराहना की। अपने आभार ज्ञापन
में वैल्हम गर्ल्स स्कूल की प्रधानाचार्या श्रीमती विभा कपूर ने समारोह की
सफलता के लिए सभी साहित्यकारों, वार्ताकारों, सहयोगी संस्थाओं,
शिक्षकों और विद्यार्थियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
उन्होंने यह भी घोषणा की कि विद्यालय अगले वर्ष भी
‘वैल्हम साहित्य स्पृहा’ की मेजबानी करना चाहता है, ताकि साहित्य और युवा पाठकों के बीच यह सार्थक संवाद निरंतर आगे बढ़ता रहे। दो
दिवसीय
‘वैल्हम साहित्य स्पृहा’ ने साहित्य को विद्यार्थियों के लिए केवल पठन का विषय न बनाकर विचार,
संवाद और रचनात्मक अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम बनाने की दिशा में एक सार्थक पहल के रूप में अपनी पहचान स्थापित की।