जयपुर: हेल्थ सेक्टर में रिसर्च और पॉलिसी मेकिंग
में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी अब साफ तौर पर नजर आने लगी है। इसका उदाहरण आईआईएचएमआर
यूनिवर्सिटी के 13वें पीएचडी बैच (2026) में देखने को मिला। इस बार पीएचडी प्रोग्राम
में प्रवेश लेने वाले रिसर्च स्कॉलर्स में 50 प्रतिशत महिलाएं हैं, जबकि पिछले बैच
में यह आंकड़ा 32 प्रतिशत था।
इस वर्ष पीएचडी प्रोग्राम
में 20 रिसर्च स्कॉलर्स ने एडमिशन लिया है। इनमें विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ),
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय (एमओएचएफडब्ल्यू), भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान
परिषद (आईसीएमआर), नीति आयोग, एम्स जम्मू, फोर्टिस हेल्थकेयर, नारायणा हेल्थ, एस्टर
मेडसिटी, द अंतरा फाउंडेशन और श्री सरस्वती कराड़ हॉस्पिटल जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों
से जुड़े प्रोफेशनल्स शामिल हैं।
आईआईएचएमआर यूनिवर्सिटी
के प्रेसिडेंट डॉ. पी. आर. सोडानी ने बताया कि इस बार पीएचडी प्रोग्राम के लिए भारत
के अलावा संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), लाइबेरिया समेत कई देशों से 120 से अधिक आवेदन
प्राप्त हुए। उन्होंने कहा कि महिला रिसर्च स्कॉलर्स की भागीदारी में 18 प्रतिशत की
बढ़ोतरी संस्थान के लिए उत्साहजनक है। उनका कहना था कि हेल्थ सेक्टर की जटिल चुनौतियों
का समाधान एविडेंस-बेस्ड रिसर्च से ही संभव है और अलग-अलग पृष्ठभूमि से आने वाले रिसर्च
स्कॉलर्स इस दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।
उन्होंने बताया कि यूनिवर्सिटी
का पीएचडी प्रोग्राम पब्लिक हेल्थ, हॉस्पिटल एंड हेल्थ मैनेजमेंट, डेवलपमेंट मैनेजमेंट,
डिजिटल हेल्थ और फार्मास्युटिकल मैनेजमेंट जैसे विषयों में रिसर्च को बढ़ावा देता है।
वर्ष 2025 तक यूनिवर्सिटी 52 रिसर्च स्कॉलर्स को पीएचडी की उपाधि प्रदान कर चुकी है।
इनके करीब 70 रिसर्च पेपर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पीयर-रिव्यूड जर्नल्स में प्रकाशित
हो चुके हैं।
पीएचडी प्रोग्राम की कोऑर्डिनेटर
डॉ. काजल सितलानी ने नए रिसर्च स्कॉलर्स का स्वागत करते हुए उन्हें जिज्ञासा, ईमानदारी
और समाज के हित में उपयोगी रिसर्च करने के लिए प्रेरित किया।
वहीं, यूनिवर्सिटी के प्रोवोस्ट
डॉ. हिमाद्रि सिन्हा ने रिसर्च स्कॉलर्स को यूनिवर्सिटी के रिसर्च फ्रेमवर्क, अकादमिक
रेगुलेशंस और रिसर्च से जुड़ी विभिन्न सुविधाओं की जानकारी दी।
कार्यक्रम का समापन रजिस्ट्रार
सुरेश चंद ठाकुर के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।