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वीआईटी भोपाल विश्वविद्यालय ने उभरती प्रौद्योगिकियों में अनुसंधान और नवाचार को गति देने के लिए CSIR-AMPRI (सीएसआईआर-एएमपीआरआई) के साथ साझेदारी की है।

वीआईटी भोपाल विश्वविद्यालय ने उभरती प्रौद्योगिकियों में अनुसंधान और नवाचार को गति देने के लिए CSIR-AMPRI (सीएसआईआर-एएमपीआरआई) के साथ साझेदारी की है।

सीहोर: वीआईटी भोपाल विश्वविद्यालय ने सीएसआईआर-एम्प्री, भोपाल के साथ उभरती प्रौद्योगिकियों में अनुसंधान और नवाचार को गति दे ने हेतु एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए। यह सहयोग उन्नत वैज्ञानिक अनुसंधान, नवाचार-आधारित शिक्षा और उद्योगोन्मुख तकनीकी विकास को सशक्त बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

 

MoU का आदान-प्रदान डॉ. (श्रीमती) एन. कलैसेल्वी, महानिदेशक, सीएसआईआर एवं सचिव, डीएसआईआर, भारत सरकार तथा डॉ. थल्लाडा भास्कर, निदेशक, सीएसआईआर-एम्प्री, भोपाल की उपस्थिति में हुआ। वीआईटी भोपाल विश्वविद्यालय की ओर से डॉ. अनंतकांत शुक्ला, उप-कुलसचिव और डॉ. एस. बालगुरु, डीन, स्कूल ऑफ मैकेनिकल इंजीनियरिंग ने प्रतिनिधित्व किया।

 

इस समझौते के अंतर्गत दोनों संस्थान संयुक्त रूप से प्रायोजित अनुसंधान परियोजनाएँ, पीएचडी मार्गदर्शन, छात्र इंटर्नशिप, संकाय विकास कार्यक्रम, कार्यशालाएँ और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण पहल करेंगे। साथ ही छात्रों और शोधकर्ताओं को उन्नत वैज्ञानिक अधोसंरचना, अनुप्रयुक्त अनुसंधान वातावरण और उद्योगोन्मुख समस्या समाधान का व्यापक अनुभव प्रदान किया जाएगा।

 

सहयोग के प्रमुख क्षेत्रों में उन्नत सामग्री, एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) एवं मशीन लर्निंग, रोबोटिक्स, बायोमटेरियल्स, एयरोस्पेस एवं प्रणोदन प्रणाली, नवीकरणीय ऊर्जा, संगणनात्मक अभियंत्रण, वायरलेस संचार, बायोमेडिकल उपकरण, वीएलएसआई एवं मेम्स प्रौद्योगिकी, इमेज प्रोसेसिंग, यूएवी सिस्टम, थर्मल साइंसेज़ और सतत अभियंत्रण अनुप्रयोग शामिल हैं।

 

ज्ञान-विनिमय और रणनीतिक सहयोग को प्रोत्साहित करते हुए वीआईटी भोपाल विश्वविद्यालय अपने शैक्षणिक एवं अनुसंधान पारिस्थितिकी तंत्र को और सुदृढ़ बनाने का लक्ष्य रखता है, ताकि छात्र और संकाय सदस्य तकनीकी प्रगति एवं वास्तविक जीवन की चुनौतियों के समाधान में सार्थक योगदान दे सकें।

 

दोनों संस्थानों के प्रतिनिधियों ने विश्वास व्यक्त किया कि यह सहयोग बहु-विषयक अनुसंधान, नवाचार और ज्ञान-विनिमय की संस्कृति को मजबूत करेगा तथा दीर्घकालिक सामाजिक प्रासंगिकता वाली प्रभावशाली प्रौद्योगिकियों के विकास में सहायक होगा।

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