डीबीएल 2.0 के तहत मल्टी-एसेट इंफ्रास्ट्रक्चर प्लेटफॉर्म की ओर तेज़
बदलाव
भोपाल : दिलीप बिल्डकॉन लिमिटेड (“डीबीएल” या
“कंपनी”), जो एक मल्टी-एसेट इंफ्रास्ट्रक्चर प्लेटफॉर्म है, ने आज 31 मार्च 2026
को समाप्त चौथी तिमाही और वित्त वर्ष 2025-26 के ऑडिटेड वित्तीय परिणामों की घोषणा
की। कंपनी ने ईपीसी कारोबार से वित्त वर्ष 26 में ₹7,005
करोड़ का राजस्व, माइनिंग कारोबार से वित्त वर्ष 26 में ₹1,692
करोड़ का राजस्व तथा इन्विट्स से वित्त वर्ष
26 में ₹64 करोड़ की आय दर्ज किया।
पिछले तीन वर्षों में डीबीएल ने अपने पारंपरिक ईपीसी कारोबार से आगे बढ़ते हुए
माइनिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर एसेट्स और अन्य दीर्घकालिक कॉन्ट्रैक्ट आधारित व्यवसायों
में रणनीतिक विस्तार किया है। डीबीएल 2.0 इस बदलाव को औपचारिक रूप देता है, जिसके
तहत कंपनी एक अधिक विविध और मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर प्लेटफॉर्म बनने की दिशा में
आगे बढ़ रही है, जिससे राजस्व की स्थिरता और कैश फ्लो में सुधार की उम्मीद है।
दिलीप सूर्यवंशी, चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक, ने कहा, “पिछले तीन दशकों से हम भारत में
इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण कर रहे हैं और इस दौरान भू-राजनीतिक संकट, कमोडिटी कीमतों
में उतार-चढ़ाव, चुनावी सुस्ती और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं जैसी कई चुनौतियों
का सामना किया है। वित्त वर्ष 26 की चौथी तिमाही में भी कुछ बाहरी चुनौतियां देखने
को मिलीं। हालांकि, इन परिस्थितियों ने डीबीएल 2.0 के तहत हमारी पहले से शुरू की गई
रणनीतिक बदलाव की आवश्यकता को और मजबूत किया है। भविष्य में कंपनी ऐसे एसेट
पोर्टफोलियो के निर्माण पर ध्यान दे रही है, जहां मुनाफे का बड़ा हिस्सा 25 से 50
वर्षों की अवधि वाले कॉन्ट्रैक्टेड एसेट्स से आए, जिससे कारोबार की दीर्घकालिक
स्थिरता मजबूत हो।”
कंपनी के प्रदर्शन पर टिप्पणी करते हुए सीईओ देवेंद्र जैन ने कहा, “वित्त वर्ष 26 की चौथी तिमाही का
प्रदर्शन हमारी उम्मीदों के अनुरूप रहा, हालांकि पूरे उद्योग में ऑर्डर मिलने की
गति धीमी रही। तिमाही के दौरान बढ़ी हुई इनपुट लागत और कम एसेट उपयोग के कारण
मार्जिन पर असर पड़ा, लेकिन हमारा मानना है कि यह दबाव अस्थायी है। वित्त वर्ष 26 के
दौरान कंपनी ने अपनी ऑर्डर बुक को मजबूत किया और माइनिंग तथा इंफ्रास्ट्रक्चर एसेट
व्यवसायों में विविधता बढ़ाई।”
परिणामों पर बात करते हुए रोशन सूर्यवंशी ने कहा, “हमारा ऋण प्रोफाइल मुख्य रूप से
एसेट आधारित और प्रोजेक्ट लिंक्ड है, जिसे दीर्घकालिक इंफ्रास्ट्रक्चर एसेट्स और
नकदी उत्पन्न करने वाले व्यवसायों का समर्थन प्राप्त है। मध्यम अवधि में कंपनी
ईपीसी बिजनेस, माइनिंग ऑपरेशंस, इनविट डिस्ट्रीब्यूशन और अनुशासित पूंजी आवंटन के
जरिए अपनी बैलेंस शीट को और मजबूत करने पर ध्यान देगी। डीबीएल 2.0 का उद्देश्य एक
संतुलित इंफ्रास्ट्रक्चर मॉडल तैयार करना है, जहां दीर्घकालिक कॉन्ट्रैक्टेड
एसेट्स ईपीसी बिजनेस के साथ मिलकर दीर्घकालिक लाभप्रदता, कैश फ्लो और रिटर्न
अनुपात को मजबूत करें।”
वित्तीय प्रदर्शन – वित्त वर्ष 26 की चौथी तिमाही (कंसोलिडेटेड आधार)
• ऑपरेशंस से राजस्व: ₹2,300 करोड़
• एबिटडा: ₹392 करोड़
• एबिटडा मार्जिन: 17.06%
• कर पश्चात लाभ (PAT): ₹124 करोड़
31 मार्च 2026 को समाप्त वित्त वर्ष के लिए कंपनी ने ₹8,984 करोड़ का
कंसोलिडेटेड ऑपरेशनल राजस्व, ₹1,766 करोड़ का एबिटडा
(मार्जिन 19.66%) और ₹1,398 करोड़ का पीएटी दर्ज किया।
31 मार्च 2026 तक कंपनी का कंसोलिडेटेड नेट डेट ₹7,244 करोड़ रहा।
वित्तीय प्रदर्शन – वित्त वर्ष 26 की चौथी तिमाही (स्टैंडअलोन आधार)
• ऑपरेशंस से राजस्व: ₹1,860
• एबिटडा: ₹199 करोड़
• एबिटडा मार्जिन: 10.07%
• कर पश्चात लाभ (पीएटी): ₹67 करोड़
31 मार्च 2026 को समाप्त वित्त वर्ष के लिए कंपनी ने ₹7,005 करोड़ का
स्टैंडअलोन ऑपरेशनल राजस्व, ₹734 करोड़ का एबिटडा (मार्जिन 10.48%) और ₹842 करोड़
का पीएटी दर्ज किया।
ऑर्डर बुक रिकॉर्ड स्तर पर
31 मार्च 2026 तक दिलीप बिल्डकॉन लिमिटेड की ऑर्डर बुक ₹28,830 करोड़ पर
पहुंच गई, जो अब तक का सबसे उच्च स्तर है। कंपनी की ऑर्डर बुक विभिन्न क्षेत्रों
में अच्छी तरह विविधीकृत है।
आउटलुक
डीबीएल आगे भी निम्नलिखित रणनीतियों पर काम जारी रखेगी:
• मध्यम अवधि में कंपनी को लगभग नेट डेट फ्री बनाना
• माइनिंग ऑपरेशंस को प्रमुख कैश फ्लो ड्राइवर के रूप में मजबूत करना
• पीपीपी एसेट्स और इनविट पोर्टफोलियो के चयनित विस्तार के जरिए नियमित कैश
फ्लो बढ़ाना
• कैपेक्स अनुशासन और पूंजी व्यय प्रबंधन बनाए रखना।