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उद्योग ने घरेलू
कीटनाशकों पर जीएसटी को 18% से घटाकर 5% करने का आग्रह किया,
ताकि वे अधिक किफायती हों और आसानी से उपलब्ध हो सकें
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इस कदम से पूरे मध्य
प्रदेश में मच्छरों से फैलने वाली बीमारियों के खिलाफ घरेलू स्तर पर सुरक्षा बढ़ने की
आशा है
भोपाल: घरेलू उपयोग वाले
कीटनाशक, जैसे
लिक्विड वेपोराइज़र, कॉइल
और एयरोसोल, भारत
के निवारक स्वास्थ्य परितंत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते आ रहे हैं, विशेष रूप
से उन घरों में
जहां वेक्टर-जनित बीमारियों से सुरक्षा के उपाय पर्याप्त नहीं हैं। निवारक
स्वास्थ्य सेवा की मज़बूती और मच्छरों से
सुरक्षा प्रदान करने वाले उत्पादों तक पहुंच बढ़ाने के लिए, 'होम इन्सेक्ट
कंट्रोल एसोसिएशन' (हिका) के नेतृत्व में
एक प्रतिनिधिमंडल ने मध्य प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री श्री राजेंद्र शुक्ला से
मुलाकात की। इस मुलाकात का लक्ष्य था, घरेलू कीटनाशकों पर जीएसटी को 18% से घटाकर 5% करने के लिए
उनका समर्थन हासिल करना।
यह बैठक ईवाय–हिका की रिपोर्ट के
निष्कर्ष सामने आने के बाद हुई। इस रिपोर्ट का विषय था - "घरेलू उपयोग वाले कीटनाशकों
के लिए जीएसटी को
तर्कसंगत बनाना: सार्वजनिक स्वास्थ्य की अनिवार्यता"। यह रिपोर्ट इस बात पर
ज़ोर देती है कि विनियमित घरेलू कीटनाशक उत्पाद अधिक किफायती और आसानी से उपलब्ध
होने चाहिए, विशेष रूप से कमज़ोर तबके और ग्रामीण आबादी के बीच।
प्रतिनिधिमंडल
ने इस बैठक के दौरान, विशेष
रूप से डेंगू और मलेरिया जैसी मच्छरों से फैलने वाली बीमारियों के खिलाफ निवारक
सार्वजनिक स्वास्थ्य उपायों को मज़बूत करने में घरेलू कीटनाशकों के महत्व को
रेखांकित किया।
राष्ट्रीय वेक्टर
जनित रोग नियंत्रण केंद्र के अनुसार,
मध्य प्रदेश में वर्ष 2025 में
डेंगू के 1941 मामले
और मलेरिया के 2307 मामले
सामने आए थे। गौरतलब है कि मध्य प्रदेश में मानसून के महीनों के दौरान मच्छरों से
फैलने वाली बीमारियों से जुड़ी चिंता बनी रहती है, इसलिए उद्योग ने कहा कि विनियमित घरेलू कीटनाशकों को अधिक किफायती
बनाने से, वंचित
समुदायों के बीच घरेलू स्तर पर सुरक्षा बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
मध्य प्रदेश के
स्वास्थ्य मंत्री,
श्री राजेंद्र शुक्ला ने मच्छर भगाने
वाले उत्पादों पर जीएसटी
कम करने की ज़रूरत के बारे में कहा,
“मध्य प्रदेश ने मच्छरों से होने वाली बीमारियों के खिलाफ लड़ाई में सक्रिय
भूमिका निभाई है। पिछले दस साल में हमने मलेरिया के मामलों में 97% की कमी हासिल
की है। गोदरेज कंज्यूमर प्रोडक्ट्स और फैमिली हेल्थ इंडिया (एफएचआई) के सहयोग से
क्रियान्वित ईएमबीईडी (मच्छर
जनित स्थानिक रोग उन्मूलन) जैसे स्वास्थ्य कार्यक्रमों के ज़रिए हमारा राज्य
राष्ट्रीय मलेरिया उन्मूलन ढांचे में मलेरिया संचरण की उच्च श्रेणी (श्रेणी 3) से कम संचरण
(श्रेणी 1) के स्तर
पर आ गया है। इस पहल
के तहत 3,047 से अधिक
गांवों और झुग्गी-बस्तियों ने मलेरिया मुक्त दर्ज़ा हासिल किया है। मच्छरों से होने
वाली बीमारियों के खिलाफ संघर्ष और उन पर नियंत्रण बनाए रखने के लिए, यह ज़रूरी है
कि नागरिकों को किफायती घरेलू कीटनाशक उत्पाद आसानी से मिल सकें। इसलिए, राज्य और
केंद्र स्तर पर जीएसटी
दरों को तर्कसंगत बनाने के तरीके पर विचार किया जाना चाहिए।”
होम इंसेक्ट
कंट्रोल एसोसिएशन (हिका)
के सचिव और निदेशक, जयंत देशपांडे ने जीएसटी में राहत की
तत्काल ज़रूरत के बारे में कहा,
“लिक्विड वेपोराइज़र जैसे घरेलू कीटनाशक उत्पाद मलेरिया और डेंगू जैसी मच्छरों
से होने वाली बीमारियों को रोकने के लिए ज़रूरी हैं। हालांकि, इन उत्पादों पर
अभी 18% कर
लगता है, जिससे
ये उपभोक्ताओं के लिए उतने किफायती नहीं रह जाते। साथ ही, अवैध कारोबारी
बिना कर दिए गैरनियमित उत्पाद बेचते हैं,
जिससे नियमों का पालन करने वाली कंपनियों के लिए बाज़ार में असमान
प्रतिस्पर्धा की स्थिति पैदा होती है। जीएसटी में कमी से न
केवल संगठित क्षेत्र को मदद मिलेगी,
बल्कि ये ज़रूरी उत्पाद घरों तक ज़्यादा आसानी से पहुंचेंगे, जिससे जन
स्वास्थ्य के परिणाम बेहतर होंगे। जीएसटी में राहत के बाद किफायती उत्पादों की खपत बढ़ने से सरकार का
राजस्व भी बढ़ सकता है। मध्य प्रदेश जैसे राज्यों से मिलने वाला प्रगतिशील सहयोग, पूरे भारत में
मच्छर से सुरक्षा से जुड़े घरेलू उत्पादों तक पहुंच बेहतर बनाने के लिए व्यापक
नीतिगत विचार-विमर्श का महत्वपूर्ण शुरुआती बिंदु बन सकता है।”
ईवाय-हिका की रिपोर्ट में
बताया गया है कि शहरी इलाकों में घरेलू कीटनाशकों की पहुंच काफी अधिक है, लेकिन ग्रामीण
इलाकों में सामर्थ्य से जुड़ी बाधाओं के कारण इनका इस्तेमाल अभी भी कम होता है।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि मौजूदा जीएसटी ढांचे से विनियमित
उत्पादों और सस्ते नकली-गैर कानूनी तरीके से निर्मित विकल्पों के बीच कीमत का अंतर
काफी बढ़ जाता है, जिससे
उपभोक्ताओं की सुरक्षा और बाज़ार में विकृति का जोखिम पैदा होता है।
ईवाय इंडिया के
टैक्स पार्टनर, बिपिन सप्रा ने सुधार के संभावित असर पर अपनी टिप्पणी में कहा, “जीएसटी घटाकर 5% करने से
सुरक्षित और विनियमित घरेलू कीटनाशकों की पहुंच काफी बढ़ सकती है, विशेष रूप से
ग्रामीण और अपेक्षाकृत अधिक जोखिम वाले इलाकों में। अधिक किफायती होने से इनका
इस्तेमाल बढ़ सकता है, वेक्टर-जनित
बीमारियों से बचाव के लिए दूर-दराज़ इलाकों तक सुरक्षा बढ़ हो सकती है, और भारत के
व्यापक निवारक स्वास्थ्य देखभाल लक्ष्यों को आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है। हालांकि, उल्टी ड्यूटी
संरचना के कारण कुछ इनपुट टैक्स क्रेडिट जमा हो सकता है, लेकिन इस
युक्तिकरण से मिलने वाले सार्वजनिक स्वास्थ्य और किफायती होने के लाभ, उद्योग के
सामने आने वाली परिचालन संबंधी चुनौतियों से कहीं अधिक है।
इस प्रतिनिधिमंडल
ने जीएसटी ढांचे
के तहत उत्पादों का अधिक स्पष्ट वर्गीकरण शुरू करने की भी सिफारिश की है, ताकि उत्पादों
को अधिक किफायती बनाया जा सके,
औपचारिकीकरण बढ़े, और
भारत के वेक्टर-जनित बीमारियों की रोकथाम के प्रयासों को मज़बूती मिले।