- पल्स्ड फील्ड एब्लेशन (Pulsed Field
Ablatio) तकनीक भारत आने से पहले
अमेरिका और यूरोप में अपनाई जा चुकी है। यह पूरी प्रक्रिया 90 मिनट से भी कम समय में पूरी हो गई, जबकि वास्तविक एब्लेशन (इलाज) का समय 30 सेकंड से भी कम था। इससे पुराने पारंपरिक इलाज के
मुकाबले करीब 60%
समय की बचत हुई।
मुंबई: पिछले करीब दो महीने
से, एक 62 वर्षीय महिला अपने हृदय की लगातार अनियमित धड़कनों से बेहद परेशान थीं।
उन्हें दवाइयाँ तो दी जा रही थीं, लेकिन उनके हृदय की
गति कब अनियंत्रित हो जाए,
कुछ कहा नहीं जा सकता था। चौंकाने वाली बात
यह थी कि हृदय गति को सामान्य करने के लिए जो दवाइयाँ उन्हें दी गईं, उनकी वजह से धड़कनों की रफ्तार खतरनाक स्तर तक धीमी होने लगी थी। इसके बाद, 16 जून 2026 को मुंबई के कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी अस्पताल में आधुनिक 'पल्स्ड फील्ड एब्लेशन'
तकनीक से उनका सफल इलाज किया गया और अगले ही दिन डिस्चार्ज दिया गया।
मरीज़ ने बताया, “मैंने कभी उम्मीद नहीं की थी कि मैं अगले ही दिन अस्पताल से पैदल चलकर बाहर आ जाऊँगी। महीनों से तेज़ धड़कनों ने मेरी रोज़मर्रा की ज़िंदगी को बुरी तरह प्रभावित कर रखा था। मुझे ऐसा महसूस हो रहा है जैसे मुझे नया जीवन मिल गया हो।”
यह प्रक्रिया
पश्चिमी भारत में की गई पहली 'पल्स्ड फील्ड एब्लेशन' (PFA) है। इसके माध्यम से एक ऐसी आधुनिक तकनीक महाराष्ट्र और व्यापक पश्चिमी क्षेत्र
के मरीज़ों तक पहली बार पहुँची है, जिसकी शुरूआत लगभग 18 महीने पहले अमेरिका में हुई थी और जिसे बाद में यूरोप के प्रमुख केंद्रों
द्वारा अपनाया गया।
'एट्रियल फाइब्रिलेशन' (AF) हृदय गति से जुड़ा सबसे आम विकार है। अनुमान है कि दुनिया भर में लगभग 5 करोड़ लोग इससे प्रभावित हैं। इस विकार के कारण हृदय के ऊपरी हिस्से के चैंबर बेहद अनियंत्रित तरीके से धड़कने लगते हैं, जिससे खून के बहाव का तालमेल बिगड़ जाता है और क्लॉट्स जमने का खतरा बढ़ जाता है। अक्सर इस बीमारी का पता नहीं चल पाता क्योंकि लगभग एक-तिहाई मरीज़ों में इसके कोई लक्षण दिखाई नहीं देते। इसके अलावा, कई मरीज़ों में यह समस्या समय-समय पर रुक-रुक कर (paroxysmal AF) होती है, जिसे सामान्य ECG के ज़रिए पहचानना मुश्किल होता है। इन कारणों और बीमारी के प्रति कम जागरूकता के चलते, भारत में AF स्क्रीनिंग को बहुत कम प्राथमिकता दी जाती है। दुनिया भर में होने वाले हर पांच स्ट्रोक में से लगभग एक स्ट्रोक की वजह 'एट्रियल फाइब्रिलेशन' ही होता है।
'पल्स्ड फील्ड
एब्लेशन'
का तरीका पारंपरिक एब्लेशन तकनीकों से बिल्कुल अलग है।
पारंपरिक तकनीकों में गर्मी (रेडियोफ्रीक्वेंसी) या ठंड (क्रायोथेरेपी) का उपयोग
करके उन असामान्य हृदय ऊतकों को नष्ट किया जाता है, जो ह्रदय की अनियमित धड़कनों के लिए ज़िम्मेदार होते हैं। इसके विपरीत, यह नई तकनीक हाई-एनर्जी इलेक्ट्रिकल पल्स की तेज़ लहरें छोड़ती है — जो
माइक्रोसेकंड के लिए लगभग 1,500
वोल्ट की होती हैं। यह 'इलेक्ट्रोपोरेशन' नामक प्रक्रिया के ज़रिए आसपास के स्वस्थ ऊतकों को नुकसान पहुँचाए बिना, केवल असामान्य हृदय कोशिकाओं को ही चुनिंदा रूप से नष्ट करती है। इसके
परिणामस्वरूप,
यह प्रक्रिया अधिक सटीक होने के साथ-साथ आसपास के अंगों या
नसों को होने वाले नुकसान के जोखिम के मामले में काफी सुरक्षित भी है।
कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी हॉस्पिटल में यह प्रक्रिया 'मेडट्रॉनिक पल्ससिलेक्ट™ पल्स्ड फील्ड एब्लेशन सिस्टम' (Medtronic PulseSelectTM Pulsed Field Ablation System) का उपयोग करके पूरी की गई। इस पूरे प्रोसीजर को 90 मिनट से भी कम समय में पूरा कर लिया गया — जो पारंपरिक तकनीकों की तुलना में लगभग 60 प्रतिशत कम समय है। मरीज़ को अगले ही दिन अस्पताल से छुट्टी दे दी गई और उम्मीद है कि वह एक हफ्ते के भीतर अपनी सामान्य दिनचर्या फिर से शुरू कर देंगी।
कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी हॉस्पिटल में कंसल्टेंट कार्डियोलॉजिस्ट और
इलेक्ट्रोफिजियोलॉजिस्ट, और 'हार्ट रिदम एंड कार्डिएक डिवाइस सर्विसेज' के ग्रुप लीड,
डॉ. वेंकट डी नागराजन ने कहा,
“पल्स्ड फील्ड एब्लेशन एट्रियल फाइब्रिलेशन के इलाज में एक
बड़ा और महत्वपूर्ण कदम है। असामान्य हृदय टिश्यूज़ को टार्गेट करने के लिए हाई-एनर्जी इलेक्ट्रिकल पल्स का
उपयोग करके,
यह तकनीक पारंपरिक एब्लेशन तरीकों की तुलना में एक अधिक
सुरक्षित और प्रभावी विकल्प प्रदान करती है। पश्चिमी भारत में इसकी शुरूआत हमारे
मरीज़ों को उनके घर के करीब ही वैश्विक स्तर की उन्नत हृदय चिकित्सा उपलब्ध कराने
की दिशा में एक बेहद महत्वपूर्ण कदम है।”
आने वाले कुछ महीनों तक एक तय फॉलो-अप प्रोटोकॉल के तहत मरीज़ की स्थिति पर कड़ी निगरानी रखी जाएगी।
पश्चिमी भारत करोड़ों लोगों की आबादी का क्षेत्र है। इसके अंतर्गत महाराष्ट्र, गुजरात, गोवा और मध्य प्रदेश आते हैं। इनमें से कई लोगों के पास पहले स्थानीय स्तर पर इस तकनीक की सुविधा उपलब्ध नहीं थी। मुंबई में 'पल्स्ड फील्ड एब्लेशन' की शुरूआत ने इस क्षेत्र के मरीज़ों के लिए पहली बार इस आधुनिक इलाज को उनकी पहुँच में ला दिया है।
यह ऐतिहासिक सफलता हृदय रोग के इलाज से जुड़े नए आविष्कारों के क्षेत्र में कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी हॉस्पिटल की अग्रणी स्थिति को और मज़बूत करती है। आधुनिक तकनीकों में लगातार निवेश, इलाज की उच्च गुणवत्ता और मरीज़ों को केंद्र में रखकर की जाने वाली देखभाल के ज़रिए, अस्पताल हमेशा विश्व स्तरीय उपचार समाधान प्रदान करने और भारत में ह्रदय की धड़कनों के इलाज के भविष्य को एक नया आकार देने के लिए पूरी तरह समर्पित है।