मेनू

×

खोजें

भारत-अमेरिका व्यापार समझौते से अर्थव्यवस्था को मिलेगा बड़ा प्रोत्साहन; $45 बिलियन के अतिरिक्त वार्षिक अधिशेष का अनुमान

भारत-अमेरिका व्यापार समझौते से अर्थव्यवस्था को मिलेगा बड़ा प्रोत्साहन; $45 बिलियन के अतिरिक्त वार्षिक अधिशेष का अनुमान

मुंबई : एसबीआई रिसर्च (SBI Research) की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, भारत और अमेरिका के बीच हुआ ऐतिहासिक व्यापार समझौता भारतीय निर्यात के लिए एक नए युग की शुरुआत करेगा। इस समझौते के तहत पारस्परिक टैरिफ दर 18% निर्धारित की गई है, जिससे भारत को प्रति वर्ष कम से कम $45 बिलियन का अतिरिक्त व्यापार अधिशेष (Trade Surplus) प्राप्त होने का अनुमान है। यह राशि भारत की जीडीपी (GDP) के 1.1% के बराबर है। यूरोपीय संघ (EU) और ब्रिटेन (UK) के साथ व्यापार समझौतों के बाद, यह डील भारत को एक अद्वितीय रणनीतिक स्थिति में खड़ा करती है, जिससे सालाना लगभग $3 बिलियन की विदेशी मुद्रा भंडार की बचत भी होगी।

इस समझौते से भारत के कपड़ा, परिधान, चमड़ा, फुटवियर और मशीनरी जैसे प्रमुख क्षेत्रों को व्यापक लाभ मिलेगा, जिन्हें अब 18% टैरिफ का लाभ प्राप्त होगा। इसके अलावा, अमेरिका भारतीय विमानों के कुछ हिस्सों पर टैरिफ हटाएगा, जबकि भारत को ऑटोमोटिव पार्ट्स के लिए तरजीही टैरिफ कोटा प्राप्त हुआ है। इसके बदले में, भारत कुछ अमेरिकी औद्योगिक सामानों और कृषि उत्पादों जैसे सूखे मेवे, फल और वाइन पर टैरिफ कम या समाप्त करेगा। यह समझौता सुनिश्चित करता है कि भारत अपनी संवेदनशीलताओं से समझौता किए बिना वैश्विक बाजार में अपनी पकड़ मजबूत करे।

निर्यात में होने वाली इस वृद्धि को समर्थन देने के लिए ऋण (Credit) की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। एसबीआई रिसर्च की रिपोर्ट बताती है कि निर्यात और निर्यात ऋण के बीच गहरा संबंध है। अनुमान है कि निर्यात में हर 1% की वृद्धि से निर्यात ऋण में 1.28% की बढ़ोतरी होगी। हालांकि 2030 तक व्यापार ऋण में $525 बिलियन की कमी का अनुमान है, लेकिन यह नया व्यापार सौदा वित्तीय संस्थानों के लिए इस अंतर को पाटने और भारतीय निर्यातकों की बढ़ती आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए एक उत्प्रेरक (Catalyst) के रूप में कार्य करेगा।

ADVERTISEMENT