माइक्रोफाइनेंस इंडस्ट्री नेटवर्क (MFIN) के सीईओ और निदेशक डॉ. आलोक मिश्रा ने आगामी केंद्रीय बजट 2026-27 से पहले माइक्रोफाइनेंस क्षेत्र की चुनौतियों और संभावनाओं पर अपने विचार साझा किए हैं। उन्होंने कहा कि लगभग 30 करोड़ अल्प आय वर्ग के लोगों के जीवन को प्रभावित करने वाले इस क्षेत्र को सटीक सत्यापन और विश्वसनीय क्रेडिट रिपोर्टिंग के लिए एक मजबूत केवाईसी (KYC) ढांचे की तत्काल आवश्यकता है।
डॉ. मिश्रा ने सर्वोच्च न्यायालय के उस निर्णय की ओर ध्यान आकर्षित किया जो आधार के उपयोग को सीमित करता है। उन्होंने सुझाव दिया कि इस समस्या का समाधान आधार के अंतिम चार अंकों के सुरक्षित भंडारण या 'टोकनाइज़ेशन' जैसे डिजिटल समाधानों के माध्यम से किया जाना चाहिए। नीतिगत समर्थन के दूसरे महत्वपूर्ण क्षेत्र के रूप में उन्होंने 'सतत फंडिंग व्यवस्था' की वकालत की। उन्होंने बताया कि एनबीएफसी-एमएफआई (NBFC-MFI) की बैंकों पर अत्यधिक निर्भरता के कारण पिछले एक साल में फंडिंग में कमी आई है, जिससे लगभग 50 लाख ग्राहक औपचारिक वित्तीय प्रणाली से बाहर हो गए हैं।
सेक्टर के प्रदर्शन पर सकारात्मक टिप्पणी करते हुए उन्होंने बताया कि क्रेडिट अनुशासन में सुधार हुआ है। आरबीआई द्वारा विनियमित संस्थाओं के लिए 'पोर्टफोलियो एट रिस्क' (1–90 दिन), जो दिसंबर 2024 में 5.3% था, वह दिसंबर 2025 के अंत तक घटकर 2.4% रह गया है। डॉ. मिश्रा ने उम्मीद जताई कि सरकार प्रस्तावित 'क्रेडिट गारंटी योजना' पर शीघ्र घोषणा करेगी, जिससे ऋणदाताओं का भरोसा बढ़ेगा और वित्तीय समावेशन को नई गति मिलेगी।