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अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने कार्यकारी टैरिफ को किया रद्द; प्रशासन ने जवाबी कार्रवाई में 10% का नया वैश्विक आयात शुल्क लगाया

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने कार्यकारी टैरिफ को किया रद्द; प्रशासन ने जवाबी कार्रवाई में 10% का नया वैश्विक आयात शुल्क लगाया

मुंबई : 20 फरवरी, 2026 को दिए गए एक ऐतिहासिक 6-3 के फैसले में, अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने 1977 के 'इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट' (IEEPA) के तहत लगाए गए व्यापक व्यापार शुल्कों को अवैध घोषित कर दिया है । अदालत ने अपने फैसले में इस बात पर जोर दिया कि अमेरिकी संविधान के अनुसार, शांति काल के दौरान कर और शुल्क लगाने की शक्ति केवल कांग्रेस के पास सुरक्षित है । कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से चीन, जापान और यूनाइटेड किंगडम जैसे देशों के साथ हुए ट्रिलियन डॉलर के मौजूदा व्यापार समझौतों पर अनिश्चितता के बादल मंडरा सकते हैं । इसके अलावा, यह मामला अब 'कोर्ट ऑफ इंटरनेशनल ट्रेड' को वापस भेज दिया गया है ताकि वसूले गए अतिरिक्त टैरिफ की सीमा तय की जा सके—अनुमान के मुताबिक यह राशि 160 से 175 बिलियन डॉलर के बीच है और अब इसे वापस (refund) करना पड़ सकता है ।

अदालती कार्यवाही के इस झटके के बावजूद, अमेरिकी प्रशासन ने अपने व्यापारिक रुख को बनाए रखने के लिए वैकल्पिक कानूनी शक्तियों का सहारा लिया है । इतिहास में पहली बार 1974 के ट्रेड एक्ट की धारा 122 का उपयोग करते हुए, प्रशासन ने 24 फरवरी, 2026 से प्रभावी 150 दिनों की अस्थायी अवधि के लिए सभी आयातों पर 10% का नया वैश्विक टैरिफ लागू कर दिया है । अमेरिका के 'बैलेंस ऑफ पेमेंट' (भुगतान संतुलन) की समस्याओं को ठीक करने के उद्देश्य से उठाए गए इस कदम को केवल कांग्रेस के कानून के जरिए ही आगे बढ़ाया जा सकता है । हालांकि USMCA का पालन करने वाले कनाडा और मेक्सिको के सामानों को इससे छूट दी गई है, लेकिन भारत सहित अन्य देशों को स्टील और एल्युमीनियम जैसे उत्पादों पर धारा 232 के तहत विशेष क्षेत्र-आधारित शुल्कों का सामना करना जारी रहेगा ।

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