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IGNOU की प्रशासनिक विफलता: पुराने छात्रों के प्रवेश रद्द, समय बर्बाद; फोन पर असंवेदनशील जवाबदेही से छात्र परेशान

IGNOU की प्रशासनिक विफलता: पुराने छात्रों के प्रवेश रद्द, समय बर्बाद; फोन पर असंवेदनशील जवाबदेही से छात्र परेशान

नई दिल्ली/लखनऊ: इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (IGNOU), जो अपने विशाल नेटवर्क के लिए जाना जाता है, इस समय छात्रों की गंभीर चिंताओं का केंद्र बना हुआ है। विश्वविद्यालय की प्रवेश और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में गहरे प्रणालीगत दोषों के कारण हजारों छात्रों, विशेष रूप से IGNOU से पहले ही स्नातक कर चुके छात्रों को अभूतपूर्व चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।

संकट की जड़ प्रशासनिक विलंब है। ऐसे कई मामले सामने आए हैं जहां योग्य छात्रों ने पिछली डिग्री पूरी करने के बाद अगली उच्च शिक्षा के लिए सफलतापूर्वक शुल्क जमा कर दिया, लेकिन विश्वविद्यालय द्वारा उनके अंतिम ग्रेड कार्ड और असाइनमेंट के अंक बहुत देर से या अपडेट ही न करने के कारण उनके दाखिले अचानक रद्द कर दिए गए।

विश्वविद्यालय के रिकॉर्ड में यह विसंगति सीधे छात्रों के अकादमिक भविष्य को प्रभावित कर रही है, जिससे उनके चार महत्वपूर्ण महीने और मेहनत की कमाई बर्बाद हो रही है।

कमजोर संचार और असंवेदनशील प्रतिक्रिया

जब छात्र इन समय-संवेदनशील समस्याओं के समाधान के लिए प्रशासनिक तंत्र से संपर्क करते हैं, तो उन्हें निराशा और कर्मचारियों की ओर से सहयोग की कमी का सामना करना पड़ता है:

  • निष्क्रिय हेल्पलाइन: विश्वविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट पर दिए गए संपर्क नंबर या तो अमान्य पाए जाते हैं या उन पर कोई प्रतिक्रिया नहीं मिलती, जिससे छात्रों के लिए सीधा संचार असंभव हो जाता है।

  • क्षेत्रीय केंद्र पर उदासीनता: एक छात्र के अनुसार, जब लखनऊ स्थित क्षेत्रीय केंद्र पर फ़ोन से संपर्क किया गया, तो उत्तर देने वाले कर्मचारी का व्यवहार असंवेदनशील रहा। कर्मचारी ने फ़ोन पर कोई जानकारी देने से इंकार कर दिया और समस्या को केवल ईमेल करने को कहा (जिसका छात्र पहले ही कई बार प्रयास कर चुका था और कोई जवाब नहीं मिला)। इसके बजाय, छात्र को निदेशक से व्यक्तिगत रूप से मिलने या अपनी शिकायत के लिए दायर की गई RTI के जवाब का इंतजार करने को कहा गया।

यह असंवेदनशील रवैया न केवल छात्रों के तनाव को बढ़ाता है, बल्कि विश्वविद्यालय के अपने ही मानकों (सम्मान और शिष्टाचार के साथ व्यवहार) के प्रति उसकी प्रतिबद्धता पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है।

समय और धन की बर्बादी का जिम्मेदार कौन?

दाखिला रद्द होने और अध्ययन केंद्र तथा क्षेत्रीय केंद्र की गलत या अधूरी सूचना के कारण जिस छात्र के चार महीने बर्बाद हुए, वह अब जवाबदेही की मांग कर रहा है। छात्र जानना चाहते हैं कि इस गंभीर प्रशासनिक विफलता, गलत संचार और समय, ऊर्जा तथा धन की बर्बादी के लिए आखिर कौन जिम्मेदार है?

यह समस्या व्यक्तिगत नहीं, बल्कि एक व्यापक प्रशासनिक विफलता का प्रमाण है। IGNOU को तत्काल इस प्रशासनिक अराजकता को संबोधित करना चाहिए और एक पारदर्शी, जवाबदेह प्रणाली स्थापित करनी चाहिए ताकि लाखों छात्रों का भविष्य खतरे में न पड़े।

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