- भारतीय ज्ञान प्रणाली (आईकेएस) प्रभाग, शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार के संरक्षण में आईकेएसएमएचए केंद्र, आईआईटी मंडी द्वारा आयोजन।
- एमबीसीसी
2026 में 500 से अधिक देशी-विदेशी विशेषज्ञों की सहभागिता।
- 290 से अधिक तकनीकी प्रस्तुतियाँ एवं 18 मुख्य व्याख्यानों के माध्यम से आधुनिक विज्ञान एवं भारतीय ज्ञान परंपराओं के समन्वय पर जोर।
मंडी : भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मंडी ने अपने कमांद परिसर, हिमाचल प्रदेश में 3 से 6 जून 2026 तक आयोजित तृतीय अंतरराष्ट्रीय “माइंड, ब्रेन एंड कॉन्शसनेस कॉन्फ्रेंस (एमबीसीसी 2026)” का सफलतापूर्वक आयोजन किया। यह सम्मेलन भारतीय ज्ञान प्रणाली एवं मानसिक स्वास्थ्य अनुप्रयोग केंद्र (आईकेएसएमएचए) द्वारा, शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार के भारतीय ज्ञान प्रणाली (आईकेएस) प्रभाग के संरक्षण में आयोजित किया गया।
इस अंतरविषयक सम्मेलन का उद्देश्य चेतना, संज्ञान, मानसिक स्वास्थ्य, कल्याण एवं मानव विकास जैसे विषयों पर आधुनिक विज्ञान और भारतीय ज्ञान परंपराओं के समन्वय के माध्यम से गहन विमर्श को आगे बढ़ाना रहा।
एमबीसीसी 2026 में भारत एवं विदेशों से 500 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया, जिनमें प्रमुख रूप से शोधकर्ता, वैज्ञानिक, चिकित्सक, शिक्षाविद, विद्यार्थी, अभ्यासकर्ता एवं नीति-निर्माता शामिल रहे। सम्मेलन में 290 से अधिक शोध पत्र, 100 पोस्टर प्रस्तुतियाँ, 18 मुख्य व्याख्यान, 7 आमंत्रित व्याख्यान, 3 पैनल चर्चाएँ, 2 कार्यशालाएँ और 4 प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया।
इन सत्रों में तंत्रिका विज्ञान, संज्ञान विज्ञान, मनोविज्ञान, योग, ध्यान, आयुर्वेद, संस्कृत अध्ययन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, मानसिक स्वास्थ्य तथा भारतीय ज्ञान परंपराओं जैसे विविध विषयों पर विचार-विमर्श हुआ।
सम्मेलन का मुख्य आकर्षण यह रहा कि इसमें आधुनिक वैज्ञानिक अनुसंधान और भारतीय ज्ञान परंपराओं के बीच एक सार्थक सेतु स्थापित करने का प्रयास किया गया, जिससे चेतना, मानव व्यवहार और मानसिक कल्याण को लेकर नई समझ विकसित हो सके।
उद्घाटन समारोह में पद्म विभूषण डॉ. पद्मा सुब्रह्मण्यम, प्रख्यात भरतनाट्यम नृत्यांगना, विदुषी एवं शोधकर्ता, मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं। उन्होंने अपने दल के साथ मनमोहक शास्त्रीय नृत्य प्रस्तुति दी।
सम्मेलन में 4 जून 2026 को पद्म भूषण पंडित अजय चक्रवर्ती, देश के प्रख्यात हिंदुस्तानी शास्त्रीय गायक, मुख्य व्याख्यान प्रस्तुत करेंगे तथा शास्त्रीय संगीत की विशेष प्रस्तुति से श्रोताओं को आनंदित करेंगे।
उद्घाटन सत्र में भारतीय ज्ञान प्रणाली (आईकेएस) प्रभाग, शिक्षा मंत्रालय के राष्ट्रीय समन्वयक एवं सम्मेलन के मुख्य संरक्षक प्रोफेसर गंटी एस. मूर्ति भी उपस्थित रहे। उन्होंने आईआईटी मंडी की सराहना करते हुए कहा कि संस्थान देश के प्रमुख आईकेएस केंद्रों में अग्रणी भूमिका निभा रहा है और चेतना अध्ययन के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।
इस अवसर पर कई महत्वपूर्ण पुस्तकों एवं प्रकाशनों का विमोचन भी किया गया, जिनमें एमबीसीसी 2023 और 2025 की कार्यवाही, “कर्म योग” (प्रो. लक्ष्मिधर बेहरा), “भारतीय ज्ञान परंपराएँ : एक परिचय” (प्रो. गौतम आर. देसाई एवं टीम), “होली तुलसी कॉन्शसनेस एंड त्रिकायी” (डॉ. महेश लोहड़ एवं टीम), “द सीक्रेट टाइम ऑफ कोड” (श्री अजय चतुर्वेदी) तथा “म्यूज़ियोपैथी” (चित्तरवीणा एन. रविकिरण) शामिल रहीं।
देश-विदेश के प्रतिष्ठित विद्वानों ने सम्मेलन में भाग लिया। इनमें अमेरिका से प्रो. स्टुअर्ट हैमरॉफ और प्रो. जॉर्जियो अस्कोली, यूनाइटेड किंगडम से प्रो. दिमित्रिस ए. पिनोट्सिस, बेल्जियम से प्रो. पीटर-जान मेस, मेक्सिको से प्रो. जोसेफा बेसेरा गोंज़ालेज़ तथा इज़राइल से प्रो. इथामार थियोडोर शामिल रहे। भारत से बी.के. शिवानी, प्रो. गंटी एस. मूर्ति, प्रो. सिसिर रॉय, डॉ. अनिरबन बंद्योपाध्याय, प्रो. शेखर पी. सेशाद्रि, प्रो. नचिकेता तिवारी, प्रो. सुधीर के. सोपोरी एवं डॉ. सुष्रुत जाधव जैसे प्रमुख विशेषज्ञ उपस्थित रहे।
आईआईटी मंडी के निदेशक प्रोफेसर लक्ष्मिधर बेहरा ने कहा कि भारत का “विश्वगुरु” बनने का दृष्टिकोण केवल आर्थिक प्रगति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मानव कल्याण, चेतना और मूल्य आधारित विकास पर केंद्रित है।
मुख्य अतिथि पद्म विभूषण डॉ. पद्मा सुब्रह्मण्यम ने कहा कि भारत की ज्ञान परंपराएँ शिक्षा को केवल ज्ञानार्जन नहीं, बल्कि मुक्ति और समग्र विकास का माध्यम मानती हैं। आईआईटी मंडी इसी दृष्टि को आधुनिक वैज्ञानिक अनुसंधान के साथ आगे बढ़ा रहा है।
एमबीसीसी 2026 ने चेतना एवं भारतीय ज्ञान परंपराओं पर वैश्विक विमर्श को नई दिशा देते हुए भविष्य में शोध और सहयोग की संभावनाओं को और सशक्त किया।