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भारत ‘दलाल राष्ट्र’ नहीं बन सकता: एस. जयशंकर का पाकिस्तान और मध्यस्थता पर बड़ा बयान

भारत ‘दलाल राष्ट्र’ नहीं बन सकता: एस. जयशंकर का पाकिस्तान और मध्यस्थता पर बड़ा बयान

क्या है पूरा मामला?

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने एक अहम बयान देते हुए कहा कि भारत “दलाल राष्ट्र” (broker nation) नहीं बन सकता

यह बयान उस समय आया जब खबरें सामने आईं कि पाकिस्तान अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत में मध्यस्थता करने की कोशिश कर रहा है।


जयशंकर ने क्या कहा?

दिल्ली में हुई एक सर्वदलीय बैठक (All-Party Meeting) के दौरान जयशंकर ने साफ कहा कि भारत किसी भी अंतरराष्ट्रीय विवाद में मध्यस्थ (mediator) की भूमिका नहीं निभाना चाहता

उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत अपनी स्वतंत्र विदेश नीति के तहत काम करता है और किसी अन्य देश के लिए “दलाल” की भूमिका नहीं निभाएगा।


यह मुद्दा क्यों उठा?

हाल ही में यह चर्चा शुरू हुई कि पाकिस्तान, अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत कराने की कोशिश कर रहा है।

इस पर भारत में राजनीतिक बहस भी शुरू हो गई, जिसमें कुछ नेताओं ने सवाल उठाया कि क्या भारत को भी ऐसी भूमिका निभानी चाहिए।

इसी संदर्भ में सरकार ने अपना रुख स्पष्ट किया।


भारत की विदेश नीति क्या कहती है?

जयशंकर ने बताया कि भारत की नीति “मल्टी-अलाइनमेंट” पर आधारित है, यानी भारत कई देशों के साथ अच्छे संबंध बनाए रखता है।

भारत:

  • अमेरिका के साथ भी मजबूत संबंध रखता है
  • ईरान के साथ भी संतुलित रिश्ते बनाए रखता है
  • किसी एक पक्ष का समर्थन करने के बजाय संतुलन बनाए रखता है

सर्वदलीय बैठक में क्या चर्चा हुई?

यह बैठक रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई थी, जिसमें कई राजनीतिक दलों के नेता शामिल हुए।

बैठक में मुख्य रूप से इन मुद्दों पर चर्चा हुई:

  • पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव
  • भारत की कूटनीतिक रणनीति
  • तेल और गैस सप्लाई की स्थिति
  • विदेशों में रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा

सरकार ने आश्वासन दिया कि देश में ईंधन की कोई कमी नहीं है और स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।


इस बयान का क्या मतलब है?

जयशंकर के इस बयान से साफ संकेत मिलता है कि:

  • भारत खुद को एक मजबूत और स्वतंत्र वैश्विक शक्ति के रूप में देखता है
  • वह किसी विवाद में “मध्यस्थ” बनकर नहीं, बल्कि अपनी शर्तों पर कूटनीति करना चाहता है
  • संवेदनशील अंतरराष्ट्रीय मामलों में भारत संतुलित और सावधानीपूर्ण रुख अपनाता है

निष्कर्ष

“भारत दलाल राष्ट्र नहीं बन सकता” वाला बयान भारत की विदेश नीति को साफ तौर पर दिखाता है।

सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारत किसी भी वैश्विक विवाद में मध्यस्थ की भूमिका निभाने के बजाय अपने राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देगा

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