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विंजो मोबाइल-फ़र्स्ट दुनिया के लिए स्टोरीटेलिंग को नए रूप
में पेश कर रहा है—2
मिनट के गेम, 2 मिनट की कहानियाँ और ऑडियो ड्रामा का
अनूठा संगम।
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बालाजी टेलीफिल्म्स के जुड़ने से सिनेमा-स्तरीय कहानी कहने की
कला को भारत के सबसे बड़े इंटरैक्टिव एंटरटेनमेंट प्लेटफ़ॉर्म का विस्तार मिलेगा।
नई दिल्ली : 250 मिलियन उपयोगकर्ताओं वाला भारत का
सबसे बड़ा इंटरैक्टिव एंटरटेनमेंट प्लेटफ़ॉर्म विंजो ने आज बालाजी टेलीफिल्म्स के
साथ एक ऐतिहासिक साझेदारी की घोषणा की। यह साझेदारी भारत के पहले ट्रांसमीडिया
यूनिवर्स का निर्माण करेगी—
एक ऐसा क्रिएटिव ईकोसिस्टम, जहाँ कहानियाँ, गेम और किरदार विभिन्न फॉर्मैट्स के
बीच सहजता से आगे–पीछे जा सकेंगे।
सिर्फ तीन महीनों के भीतर, विंजो के माइक्रोड्रामा प्लेटफ़ॉर्म ZO TV ने भारत में अधिग्रहित या कमीशन किए
गए 500 से अधिक शीर्षकों का आँकड़ा पार कर
लिया है। शॉर्ट-फॉर्मेट एंटरटेनमेंट क्षेत्र में यह अब तक की सबसे तेज़ कंटेंट
विस्तार गति है। स उपलब्धि के साथ भारत ने 26 अरब
अमेरिकी डॉलर वाले वैश्विक शॉर्ट-ड्रामा उद्योग में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज की
है—जो दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती क्रिएटिव कैटेगरीज में से एक है।
विंजो अपने सफल प्रकाशन और वितरण
नेटवर्क—100
से अधिक गेम्स, 75,000 क्रिएटर्स के समुदाय और भारत तथा
अमेरिका जैसे स्थापित बाज़ारों के साथ ब्राज़ील जैसे उभरते हुए बाज़ारों में 250 मिलियन उपयोगकर्ताओं—का उपयोग करते
हुए, कम समय में प्लेटफ़ॉर्म पर 10 करोड़ से अधिक एपिसोड व्यूज़ दर्ज कर
चुका है। विंजो का यह विस्तार उस नई क्रिएटिव इकोनॉमी को परिभाषित कर रहा है, जहाँ मनोरंजन, तकनीक और संस्कृति एक साथ विकसित हो
रहे हैं।
वैश्विक स्तर पर माइक्रोड्रामा की
लोकप्रियता तेज़ी से बढ़ी है—बाज़ार आकार, उपयोगकर्ता
आधार, मोबाइल ऐप डाउनलोड और कंटेंट निर्माण
सभी क्षेत्रों में अभूतपूर्व वृद्धि देखी गई है। अनुमान है कि शॉर्ट-ड्रामा उद्योग
वर्ष 2025 के 12 अरब अमेरिकी डॉलर से बढ़कर वर्ष 2030 तक 26 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुँच जाएगा।
वैश्विक ट्रांसमीडिया फ्रैंचाइज़ी
बनाने के लिए भारत को माइक्रोड्रामा फॉर्मैट में सिनेमा-स्तरीय कंटेंट तैयार करना
होगा। यही दृष्टि विंजो और बालाजी टेलीफिल्म्स की इस दीर्घकालीन एक्सक्लूसिव
साझेदारी के केंद्र में है। भारतीय टेलीविज़न और स्ट्रीमिंग कंटेंट को नई दिशा
देने वाली बालाजी टेलीफिल्म्स अब विंजो के साथ मिलकर सिनेमा-गुणवत्ता वाले
प्रीमियम माइक्रोड्रामा तैयार करेगी—जो भारतीय दर्शकों के साथ-साथ वैश्विक दर्शकों
को भी ध्यान में रखकर बनाए जाएँगे।
विंजो के सह-संस्थापक पवन नंदा ने
कहा, “हम भारत से दुनिया का पहला
ट्रांसमीडिया प्लेटफ़ॉर्म बना रहे हैं, जहाँ
गेम्स, कहानियाँ और अन्य डिजिटल अनुभव एक ही
जगह सह-अस्तित्व में हों। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए हम साझेदारियाँ कर रहे
हैं और रचनात्मक इकोसिस्टम को एक साथ लाने में निवेश कर रहे हैं। माइक्रोड्रामा
मनोरंजन की अगली वैश्विक सीमा है। बालाजी के साथ हमारी रणनीतिक साझेदारी
सर्वश्रेष्ठ कहानीकारों और सर्वश्रेष्ठ तकनीक को जोड़ती है, ताकि ऐसी कहानियाँ बनाई जा सकें जो
वास्तविक हों,
लोगों से जुड़ें, और भारत ही नहीं, पूरे विश्व पर प्रभाव छोड़ें। हम इस
साझेदारी के ज़रिए अपनी 25
करोड़ से अधिक पंजीकृत उपभोक्ता
संख्या तक नई कहानियाँ पहुँचाने को उत्साहित हैं।”
बालाजी टेलीफ़िल्म्स लिमिटेड की
संयुक्त प्रबंध निदेशक एकता कपूर ने कहा, “बालाजी
का हमेशा मानना रहा है कि कहानी कहने का तरीका समय के साथ बदलना चाहिए। टेलीविज़न
से डिजिटल और अब माइक्रोड्रामा तक हमारी यात्रा नवाचार और दर्शकों से गहरे जुड़ाव
की इच्छा से प्रेरित रही है। विंजो के साथ इस सहयोग के माध्यम से हम ऐसे
माइक्रोड्रामा बना रहे हैं जो भारत की बदलती डिजिटल संस्कृति को प्रतिबिंबित करते
हैं।”
बालाजी टेलीफ़िल्म्स लिमिटेड के
मुख्य राजस्व अधिकारी नितिन बर्मन ने कहा, “आज
दर्शक कम अवधि वाले कंटेंट की ओर तेज़ी से बढ़ रहे हैं, लेकिन उनकी चाहत अभी भी वही
है—भावनाएँ,
ड्रामा और कनेक्शन। यही तत्व बालाजी
की कहानी कहने की नींव हैं। विंजो के साथ यह साझेदारी रचनात्मकता और तकनीक का
शक्तिशाली संगम है—जहाँ तकनीक पहुँच बढ़ाती है और कहानी कहने का अनुभव पहले से
कहीं अधिक इंटरएक्टिव और आकर्षक हो जाता है।”
विंजो इस श्रेणी में एक रचनात्मक
परिवर्तन लाने का लक्ष्य रखता है—जहाँ गुणवत्ता-पूर्ण लेखन, प्रामाणिक चरित्र और भारतीय संस्कृति
में जड़ित कथानक मिलकर भारत की कहानी कहने की आत्मा को संरक्षित करें, और एक वैश्विक ट्रांसमीडिया
फ्रेंचाइज़ की नींव तैयार करें। कंपनी भारत के अगले दौर के कहानीकारों को तैयार
करने में भी निवेश कर रही है—वर्कशॉप्स, क्रिएटर
एक्सेलेरेटर प्रोग्राम्स और सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा आयोजित वेव्स
फ़िल्म बाज़ार और अंतर्राष्ट्रीय फ़िल्म महोत्सव जैसे प्रमुख मंचों पर उद्योग सहयोग के माध्यम
से।
इन पहलों का उद्देश्य उन नए
रचनाकारों को प्रोत्साहित करना है, जो
माइक्रोड्रामा को ट्रांसमीडिया की पहली सीढ़ी बनाकर भारत की कहानियों को दुनिया तक
पहुँचाएँगे।