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ताजमहल पर सवाल, अदालत में तूफ़ान — द ताज स्टोरी

ताजमहल पर सवाल, अदालत में तूफ़ान — द ताज स्टोरी

 ताज स्टोरी एक ऐसी फिल्म है जो ध्यान खींचती है। यह धीरे-धीरे कुछ नहीं कहती — यह ऊँची आवाज़ में बोलती है और दर्शक को सोचने पर मजबूर करती है। फिल्म दुनिया के सबसे मशहूर स्मारकों में से एक, ताजमहल को बीच में रखकर एक बड़ी बहस शुरू करती है। सवाल सीधा है: क्या ताजमहल वही है जो हमें बताया गया है?

फिल्म में परेश रावल ने विष्णु दास का किरदार निभाया है, जो आगरा का एक टूर गाइड है। वह मानता है कि ताजमहल को शाहजहां ने नहीं बनाया, बल्कि यह पहले एक हिंदू महल था। इस “सच्चाई” को सामने लाने के लिए वह कोर्ट में केस करता है — और यहीं से असली ड्रामा शुरू होता है।


क्या अच्छा है

  • परेश रावल का अभिनय शानदार है। उनकी आवाज़, हावभाव और संवाद बहुत असरदार हैं। जब वे बोलते हैं, स्क्रीन में जान आ जाती है।

  • कहानी का विचार अलग और दिलचस्प है। यह आपको सोचने पर मजबूर करता है कि क्या इतिहास वैसा ही है जैसा हमने सुना है?

  • कोर्ट के सीन में खूब गर्मी है। बहस, तकरार, सवाल-जवाब — देखने में मज़ा आता है।


क्या कमजोर पड़ता है

लेकिन फिल्म की बड़ी कमी यह है कि यह सब कुछ बोलती है, पर ठीक-ठीक साबित नहीं करती। यहां बातें तो बड़ी-बड़ी हैं, पर ठोस सबूत कम दिखते हैं। कई जगह लगता है जैसे किसी लंबे व्हाट्सएप बहस को फिल्म बना दिया गया हो — भावनाएं ज्यादा, तथ्य कम।

कहानी कई बार धीरे हो जाती है और वही बातें दोहराई जाती हैं। फिल्म इतिहास पर गहरी रिसर्च दिखाने के बजाय दर्शक की भावनाओं को उकसाने पर ज़्यादा ध्यान देती है।


फिल्म का माहौल

फिल्म आपको झकझोरना चाहती है। यह चाहती है कि आप सोचें, सवाल पूछें, और शायद नाराज़ या असहज भी महसूस करें।
लेकिन इसी कोशिश में यह कहीं-कहीं संतुलन खो देती है। यह सच ढूंढने से ज़्यादा बहस जीतने में लगी दिखाई देती है।


अंतिम राय

द ताज स्टोरी का आइडिया दमदार है और परेश रावल इसे मजबूती देते हैं। यह फिल्म चर्चा जरूर पैदा करेगी, लोग इस पर बहस भी करेंगे।

लेकिन फिल्म अपने बड़े दावे को मजबूत सबूतों से सपोर्ट नहीं कर पाती। सवाल तो बहुत हैं, जवाब थोड़े कमजोर लगते हैं।

अगर आपको तेज़ courtroom drama और दमदार डायलॉग पसंद हैं, तो यह फिल्म आपको जोड़े रखेगी।
अगर आप साफ-सुथरी रिसर्च और संतुलित इतिहास देखना चाहते हैं, तो यह फिल्म आपको पूरी तरह संतुष्ट नहीं करेगी।

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