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ग्रीन रिवोल्यूशन से रिसोर्स रिवोल्यूशन तक: भारत को खनिज आत्मनिर्भरता का लक्ष्य बनाना चाहिए, वेदांता चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने कहा

ग्रीन रिवोल्यूशन से रिसोर्स रिवोल्यूशन तक: भारत को खनिज आत्मनिर्भरता का लक्ष्य बनाना चाहिए, वेदांता चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने कहा

हाल ही में एक सोशल मीडिया पोस्ट में, अनिल अग्रवाल, चेयरमैन, वेदांता ग्रुप ने इस बात पर जोर दिया कि भारत के खनिज और हाइड्रोकार्बन संसाधनों की खोज को राष्ट्रीय प्राथमिकता बनाया जाना चाहिए। उन्होंने आयात निर्भरता कम करने, देश की विशाल भू-वैज्ञानिक क्षमता को उजागर करने और बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन के लिए “भूमिगत क्रांति” (below-the-ground revolution) का आह्वान किया।

पूरी दुनिया जानती है कि भारत ने अपने कृषि क्षेत्र में किस तरह एक 'जन आंदोलन' खड़ा किया था, जिसकी वजह से बढ़ती हुई आबादी के बावजूद हम अनाज के मामले में आत्मनिर्भर बने। इसके लिए मैं अपने देश के किसानों को नमन करता हूँ।

हरित क्रांति इसलिए सफल हुई क्योंकि तब पूरा हिंदुस्तान एक साथ खड़ा हो गया था। अब फिर से वक्त आ गया है कि हम ज़मीन के नीचे के संसाधनों के लिए भी वैसी ही क्रांति लाएँ, ताकि आयात (imports) करने की मजबूरी से आज़ाद हो सकें।

इस क्षेत्र में अपार संभावनाएँ हैं और मेरा अनुमान है कि हमारे तीस से चालीस प्रतिशत लोगों को, खासकर युवाओं को, इसमें करियर बनाने और अपनी रोज़ी-रोटी कमाने के बेहतरीन मौके मिलेंगे, क्योंकि भारत की जियोलॉजी दुनिया में सबसे शानदार है।

ज़ाहिर है, इसके लिए जैसा हमने खेती के मामले में किया था, वैसे ही कदम उठाने होंगे। सरकार को बहुत लचीला (flexible) होना पड़ेगा। हाँ, पर्यावरण के मामले में कोई समझौता नहीं होना चाहिए, क्योंकि वो सबसे ऊपर है। लेकिन exploration एक ऐसा शब्द बन जाना चाहिए जो सबको, चाहे वो आम लोग हों, startup हों, छोटी कंपनियाँ हों या बड़ी, इस national mission में एक साथ जोड़ दे।

सबसे ज़रूरी बात, हमें क्रांतिकारी सोच अपनानी होगी और दुनिया को दिखाना होगा कि हम पुरानी मानसिकता छोड़ रहे हैं, जैसे कि अभी खदानों के लिए 50 साल की fixed lease होती है। दुनिया के बाकी देशों की तरह भारत में भी यह 'life of mine' (जब तक खदान में संसाधन हैं) तक के लिए होनी चाहिए। हमें सिर्फ़ नीलामी (auctions) जैसी किसी एक प्रक्रिया से बंधे नहीं रहना है। हमारा असली मकसद नतीजे हैं, यानी प्रोडक्शन में बड़े पैमाने पर बढ़ोतरी।

यह सब काम दुनिया में बहुत जगहों पर कामयाबी से हो चुका है। हम आज बहुत अच्छी स्थिति में हैं। हमारे पास आज की आधुनिक तकनीक है, युवाओं की ताकत है, हमारे उत्साही उद्यमी (entrepreneurs) हैं और एक सकारात्मक सरकार है। मेरा यक़ीन है कि ज़मीन के नीचे की इस क्षमता को विकसित करने का काम हम सबसे तेज़ी से करके दिखाएंगे।

आज हमारा 50% आयात इन्हीं ज़मीन के नीचे वाले संसाधनों का है। यह हमारी गाढ़ी कमाई का पैसा है जो दूसरे देशों में नौकरियाँ पैदा कर रहा है। क्यों न इस पैसे का इस्तेमाल हम अपने देश के विकास के लिए करें?

आइए, हम सब इस काम के लिए 'mission mode' में एक साथ आएं, क्योंकि ज़मीन के नीचे की यह क्रांति हमारे देश की तस्वीर बदल देगी।

 

Facebook Post: https://www.facebook.com/anilagarwal.thegreatergood/posts/pfbid0dbc4JK5AJMWNpituu6bfWcDvtdej4m3ENPT4wT7AEA5FBNffaHfPC2et9Dfk1fgbl?rdid=m7w84nDgxEL5XEls#

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